221 2122 221 2122
हर दिन के हादसों से हैरान जिंदगी है
नफरत मिटा दिलों से ईमान जिंदगी है/1/
खुशियाँ लुटा सभी में दिल को खुशी मिलेगी
दो चार दिन यहाँ पर मेहमान जिंदगी है/2/
हसरत औ जिम्मेदारी और कोई भी जरूरत
ये तीन गर न हो तो आसान जिंदगी है/3/
अब आंख बंद करते लगने लगा है डर सा
सिरहाने ख्वाब बैठे परेशान जिंदगी है/4/
लम्बे सफर के खातिर अच्छा न साथ मेरा
दो चार पल कहो तो कुर्बान जिंदगी है /5/
रोटी मिले मुझे बस चाहत मेरी यही थी
अब ख्वाब में उलझ कर हलकान जिंदगी है/6/
कल रात खूब बातें खुद से किया है जी भर
तुझको भुलाने का ही ऐलान जिंदगी है/7/
पड़ता है फेंकना हर दिन ही कबाड़ में कुछ
इस हद भरे हुए हैं अरमान जिंदगी है/8/
अब भूल मैं चुका हूँ तुमको है याद मुझको
रहता ये याद हर पल बे जान जिंदगी है/9/
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