Monday, 6 September 2021

हर दिन के हादसों से हैरान जिंदगी है

221 2122 221 2122 
हर  दिन  के   हादसों  से    हैरान   जिंदगी है
नफरत   मिटा   दिलों  से   ईमान   जिंदगी है/1/

खुशियाँ लुटा सभी में  दिल को खुशी मिलेगी
दो चार  दिन  यहाँ  पर   मेहमान   जिंदगी है/2/

हसरत औ जिम्मेदारी और कोई भी जरूरत
ये  तीन  गर  न  हो  तो   आसान  जिंदगी है/3/

अब  आंख  बंद  करते लगने लगा है डर सा
सिरहाने   ख्वाब    बैठे   परेशान  जिंदगी है/4/

लम्बे  सफर  के  खातिर अच्छा न साथ मेरा
दो  चार   पल  कहो  तो   कुर्बान  जिंदगी है /5/

रोटी  मिले  मुझे  बस   चाहत  मेरी  यही थी
अब ख्वाब में उलझ कर हलकान जिंदगी है/6/

कल रात खूब बातें  खुद से किया है जी भर
तुझको   भुलाने  का  ही   ऐलान  जिंदगी है/7/

पड़ता है फेंकना हर दिन ही  कबाड़ में कुछ
इस  हद   भरे  हुए  हैं    अरमान  जिंदगी है/8/

अब भूल मैं चुका हूँ  तुमको है याद मुझको
रहता  ये  याद  हर  पल  बे जान जिंदगी है/9/

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