Saturday, 27 July 2019

रखे हैं शौक जरूरत जुदा जुदा करके

रखे हैं शौक जरूरत जुदा जुदा करके
खयाल ख्वाब तमन्ना सजा सजा करके

तमाम उम्र मुकम्मल नही जो हो पायी
पिघल रही है वो हसरत रुला रुला करके

गजब का यार मिला हमको राहे उल्फत में
सितम करे है सितमगर बता बता करके

वो कत्ल करने की देता है धमकियां मुझको
किया है इश्क भी उसने डरा डरा करके

वो भी शरीक था मेरे तमाशबीनों में
पुकारते हैं जिसे सब खुदा खुदा करके

कदम कदम पे है मौजूद वो मेरा मालिक
रखा है जिसको बशर ने जुदा जुदा करके

नजर मिजाज नजरिया कि तल्खियां देखूं

नजर मिजाज नजरिया कि तल्खियां देखूं
उलाहनों  में   मुहब्बत   कहां कहां  देखूं

सितमगरी  में  वो  उस्ताद  हैं  जमाने में
कुछ ऐसे खबरों की मै रोज सुर्खियां देखूं

शरारतें  हैं  बहुत   उनकी  मुस्कुराहट में
लबों के जुम्बिशे इल्लत की शोखियां देखूं

वो हिचकियों में कहीं याद कर रहा शायद
खयाल  ख्वाब में  अब मै अना कहां देखूं

जरा सी आंच बची है जो दिल में रहने दो
दिली  तमन्ना है  हसरत  धुंआ धुंआ  देखूं

शरीक है वो मेरे  जिस्म में  महक बनकर
मै  बेखबर  हूँ  उसे  बस  यहाँ वहाँ  देखूं

Friday, 26 July 2019

मुद्दतें जिनको लगी दिल से भुलाने के लिए

मुद्दतें  जिनको  लगी दिल से भुलाने के लिए
फिर चली आयी   वही याद  सताने  के लिए

वक्त  के साथ   जो  धुंधला   से  गए थे लम्हें
सामने  आंख के  फिर आए  रूलाने के लिए

हर  कदम   पर  वो   नये  रब्त   बना  लेते हैं
हम  तरसते  है  यहां   दोस्त   पुराने  के लिए

रूठकर  देखा  है  हमने  भी  कई  बार  मगर
कोई  आया  ही नही  हमको  मनाने  के लिए

अपने कांधे पे वो लाश अपनी लिए फिरता है
मुस्कुराता है  फकत  सबको  दिखाने के लिए

हर दफा  और   नया  जोश  मिला  उठने का
मुश्किलें  आयीं   कई  बार   गिराने   के लिए

कुछ नये  ख्वाब सजा कर के  बुझी आंखों में
जिंदगी  यूँ  भी मिली  हमसे  रिझाने  के लिए

स्याह  रातों  को  निचोड़ा  है  बड़ी  शिद्दत से
अपनी बस्ती को  नया शम्स  दिखाने के लिए

यूँ  ही   चेहरे  पे   लकीरें  नहीं  बनती  साहब
जीने   पड़ते  हैं   तजुर्बे   ये   बनाने  के लिए

आदमी है  कि मदारी  है   समझना  मुश्किल
खुद  तमाशा  वो बना  सबको हंसाने के लिए

Tuesday, 9 July 2019

ये जिंदगी भी क्या है कहीं जिंदगी कोई

221 2121 1221 212
ये जिन्दगी भी क्या है  कहीं जिंदगी कोई
मिलती है यूं कि जैसे मिले अजनबी कोई

तय फासलों के साथ मिली हर खुशी हमे
लगने लगी है  अब तो ये  खैरात सी कोई

किरदार सब निभाए है  संजीदगी के साथ
हमने किसी से की  न कभी दिल्लगी कोई

औकात  बख्श  करके  खुदा तौलता तुम्हें
मौका लपक ले  कर  ले जरा बेहतरी कोई

मजमा सा देखकर के  जरा  हम ठहर गए
नीलाम  हो  रहा  था   वहां  आदमी  कोई

छप्पर नही है आज भी हर आदमी के सर
राहत  बंटी  है   खूब   यहां  कागजी  कोई

किरदार  आईने  में  नजर  आते  ही  नही
कितनी सफाई कर ले यहां जिस्म की कोई

रोने की हमको  कोई  इजाजत  नही मियां
चाहे   हो   जिंदगी  में  यहां    बेबसी कोई

Sunday, 7 July 2019

तमाम दर्द को दिल में दबा के बैठ गए

तमाम  दर्द  को   दिल  में   दबा  के   बैठ गए
सुकून    वास्ते     माजी     भुला  के  बैठ गए

वो  याद आते  हैं अब  तो  बड़ी  मशक्कत से
अतीत  से  तो  बहुत  धोखे  खा  के  बैठ गए

मै  आजकल  तो  सरेआम  बिक  रहा साहब
जमीर   हूँ  मै   मुझे   सब  भुला  के  बैठ गए

ये  बारिशों  ने   किया   शहर  तर ब तर  ऐसे
जनाबे  आली  सभी  मुंह  छिपा  के  बैठ गए

ये   बाहमी   से  मरासिम  के  फेर  में  साहब
क्यूँ  गफलतों  की बिमारी  भुला के  बैठ गए

न कर  तू  फिक्र  हमारी  हैं  ठीक  हम  बेटा
मां बाप  फोन पे  हर गम  छिपा के  बैठ गए

बहुत   उदास  थे    मीनार   भी   कंगूरे   भी
फिर एक  दूजे के  वो पास  आ के  बैठ गए

गुजरते   वक्त    मुझे     बार  बार    छेड़ें  है
न पाए मन का तो फिर वो रूसा के बैठ गए

हमारे  हद  की  खबर थी  हमें भी  अच्छे से
सो  बात  रोक  वहीं  चुप  लगा  के  बैठ गए

Wednesday, 3 July 2019

देखिए क्या से क्या हो गया

देखिए  क्या से क्या  हो गया
हर कदम   हादसा   हो गया

रब्त  सारे    कहीं   खो  गए
दर्द   अपना   सगा   हो गया

हर कदम  इक नया दर्द अब
रोज का  सिलसिला  हो गया

जो मिले  हम  मुताबिक नही
वक्त  हमसे   खफा  हो गया

क्या करें जिक्र हम रश्क का
हर अजीज अब तेरा हो गया

ये  गजब   हादसा  हो  गया
दिल  मेरा  अब तेरा हो गया

तब्सिरा   तजकिरा  मशविरा
सब  ही  तेरे   सिवा हो गया

हमसे पुछा न  कुछ बात की
और  हर   फैसला   हो गया

जिंदगी   खैर मक्दम    तेरा
दफ्फतन   सामना   हो गया

जब से दिल  ये हुआ है तेरा
दर्द ही  अब   दवा  हो गया

कोठियों  की हुई  बिजलियाँ
मुफलिसी  का दिया हो गया

पहने  जूते जो  पापा के हम
मुश्किलों का   पता  हो गया

जिंदगी    बे बहर    हो  गई
जो गलत  काफिया  हो गया

कल तलक मै भला था बहुत
आज  अचानक बुरा हो गया

दैर  कहिए  या  कहिए हरम
एक  सा  फलसफा  हो गया

रब  नदारद  हुआ  आजकल
आदमी   जब  खुदा  हो गया

नज़र मिजाज नजरिया कि तल्खियां देखूं

नजर मिजाज नजरिया कि तल्खियां देखूं
उलाहनों  में   मुहब्बत   कहां कहां  देखूं

सितमगरी  में  वो  उस्ताद  हैं  जमाने में
कुछ ऐसे खबरों की मै रोज सुर्खियां देखूं

शरारतें  हैं  बहुत   उनकी  मुस्कुराहट में
लबों के जुम्बिशे इल्लत की शोखियां देखूं

वो हिचकियों में कहीं याद कर रहा शायद
खयाल  ख्वाब में  अब मै अना कहां देखूं

जरा सी आंच बची है जो दिल में रहने दो
दिली  तमन्ना है  हसरत  धुंआ धुंआ  देखूं

शरीक है वो मेरे  जिस्म में  महक बनकर
मै  बेखबर  हूँ  उसे  बस  यहाँ वहाँ  देखूं

रखे हैं शौक जरूरत जुदा जुदा करके

रखे   हैं  शौक   जरूरत  जुदा जुदा करके
खयाल   ख्वाब   तमन्ना  सजा सजा करके

तमाम  उम्र  मुकम्मल  नहीय जो  हो पायी
पिघल रही अब वो हसरत रुला रुला करके

गजब का यार  मिला हमको राहे उल्फत में
सितम  करे  है  सितमगर  बता बता करके

वो कत्ल करने की देता है धमकियां मुझको
किया है  इश्क  भी  उसने  डरा डरा करके

वो  भी   शरीक  था   मेरे   तमाशबीनों में
पुकारते  हैं   जिसे  सब  खुदा खुदा करके

कदम कदम  पे है  मौजूद  वो मेरा मालिक
रखा है  जिसको  बशर ने जुदा जुदा करके