मुद्दतें जिनको लगी दिल से भुलाने के लिए
फिर चली आयी वही याद सताने के लिए
वक्त के साथ जो धुंधला से गए थे लम्हें
सामने आंख के फिर आए रूलाने के लिए
हर कदम पर वो नये रब्त बना लेते हैं
हम तरसते है यहां दोस्त पुराने के लिए
रूठकर देखा है हमने भी कई बार मगर
कोई आया ही नही हमको मनाने के लिए
अपने कांधे पे वो लाश अपनी लिए फिरता है
मुस्कुराता है फकत सबको दिखाने के लिए
हर दफा और नया जोश मिला उठने का
मुश्किलें आयीं कई बार गिराने के लिए
कुछ नये ख्वाब सजा कर के बुझी आंखों में
जिंदगी यूँ भी मिली हमसे रिझाने के लिए
स्याह रातों को निचोड़ा है बड़ी शिद्दत से
अपनी बस्ती को नया शम्स दिखाने के लिए
यूँ ही चेहरे पे लकीरें नहीं बनती साहब
जीने पड़ते हैं तजुर्बे ये बनाने के लिए
आदमी है कि मदारी है समझना मुश्किल
खुद तमाशा वो बना सबको हंसाने के लिए
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