Friday, 26 July 2019

मुद्दतें जिनको लगी दिल से भुलाने के लिए

मुद्दतें  जिनको  लगी दिल से भुलाने के लिए
फिर चली आयी   वही याद  सताने  के लिए

वक्त  के साथ   जो  धुंधला   से  गए थे लम्हें
सामने  आंख के  फिर आए  रूलाने के लिए

हर  कदम   पर  वो   नये  रब्त   बना  लेते हैं
हम  तरसते  है  यहां   दोस्त   पुराने  के लिए

रूठकर  देखा  है  हमने  भी  कई  बार  मगर
कोई  आया  ही नही  हमको  मनाने  के लिए

अपने कांधे पे वो लाश अपनी लिए फिरता है
मुस्कुराता है  फकत  सबको  दिखाने के लिए

हर दफा  और   नया  जोश  मिला  उठने का
मुश्किलें  आयीं   कई  बार   गिराने   के लिए

कुछ नये  ख्वाब सजा कर के  बुझी आंखों में
जिंदगी  यूँ  भी मिली  हमसे  रिझाने  के लिए

स्याह  रातों  को  निचोड़ा  है  बड़ी  शिद्दत से
अपनी बस्ती को  नया शम्स  दिखाने के लिए

यूँ  ही   चेहरे  पे   लकीरें  नहीं  बनती  साहब
जीने   पड़ते  हैं   तजुर्बे   ये   बनाने  के लिए

आदमी है  कि मदारी  है   समझना  मुश्किल
खुद  तमाशा  वो बना  सबको हंसाने के लिए

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