Tuesday, 9 July 2019

ये जिंदगी भी क्या है कहीं जिंदगी कोई

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ये जिन्दगी भी क्या है  कहीं जिंदगी कोई
मिलती है यूं कि जैसे मिले अजनबी कोई

तय फासलों के साथ मिली हर खुशी हमे
लगने लगी है  अब तो ये  खैरात सी कोई

किरदार सब निभाए है  संजीदगी के साथ
हमने किसी से की  न कभी दिल्लगी कोई

औकात  बख्श  करके  खुदा तौलता तुम्हें
मौका लपक ले  कर  ले जरा बेहतरी कोई

मजमा सा देखकर के  जरा  हम ठहर गए
नीलाम  हो  रहा  था   वहां  आदमी  कोई

छप्पर नही है आज भी हर आदमी के सर
राहत  बंटी  है   खूब   यहां  कागजी  कोई

किरदार  आईने  में  नजर  आते  ही  नही
कितनी सफाई कर ले यहां जिस्म की कोई

रोने की हमको  कोई  इजाजत  नही मियां
चाहे   हो   जिंदगी  में  यहां    बेबसी कोई

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