तमाम दर्द को दिल में दबा के बैठ गए
सुकून वास्ते माजी भुला के बैठ गए
वो याद आते हैं अब तो बड़ी मशक्कत से
अतीत से तो बहुत धोखे खा के बैठ गए
मै आजकल तो सरेआम बिक रहा साहब
जमीर हूँ मै मुझे सब भुला के बैठ गए
ये बारिशों ने किया शहर तर ब तर ऐसे
जनाबे आली सभी मुंह छिपा के बैठ गए
ये बाहमी से मरासिम के फेर में साहब
क्यूँ गफलतों की बिमारी भुला के बैठ गए
न कर तू फिक्र हमारी हैं ठीक हम बेटा
मां बाप फोन पे हर गम छिपा के बैठ गए
बहुत उदास थे मीनार भी कंगूरे भी
फिर एक दूजे के वो पास आ के बैठ गए
गुजरते वक्त मुझे बार बार छेड़ें है
न पाए मन का तो फिर वो रूसा के बैठ गए
हमारे हद की खबर थी हमें भी अच्छे से
सो बात रोक वहीं चुप लगा के बैठ गए
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