Sunday, 7 July 2019

तमाम दर्द को दिल में दबा के बैठ गए

तमाम  दर्द  को   दिल  में   दबा  के   बैठ गए
सुकून    वास्ते     माजी     भुला  के  बैठ गए

वो  याद आते  हैं अब  तो  बड़ी  मशक्कत से
अतीत  से  तो  बहुत  धोखे  खा  के  बैठ गए

मै  आजकल  तो  सरेआम  बिक  रहा साहब
जमीर   हूँ  मै   मुझे   सब  भुला  के  बैठ गए

ये  बारिशों  ने   किया   शहर  तर ब तर  ऐसे
जनाबे  आली  सभी  मुंह  छिपा  के  बैठ गए

ये   बाहमी   से  मरासिम  के  फेर  में  साहब
क्यूँ  गफलतों  की बिमारी  भुला के  बैठ गए

न कर  तू  फिक्र  हमारी  हैं  ठीक  हम  बेटा
मां बाप  फोन पे  हर गम  छिपा के  बैठ गए

बहुत   उदास  थे    मीनार   भी   कंगूरे   भी
फिर एक  दूजे के  वो पास  आ के  बैठ गए

गुजरते   वक्त    मुझे     बार  बार    छेड़ें  है
न पाए मन का तो फिर वो रूसा के बैठ गए

हमारे  हद  की  खबर थी  हमें भी  अच्छे से
सो  बात  रोक  वहीं  चुप  लगा  के  बैठ गए

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