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क्या रह गया है शहर में खँडरात के सिवा
मिलती नही खबर कोई आफात के सिवा/1/
मशरुफियत दिखी है हर इक शख्स में यहां
मिलता है गर्मजोशी से जज्बात के सिवा/2/
तस्वीर हमने देखी है गुजरे हयात की
ठहरा मिला है वक्त भी लमहात के सिवा/3/
करती है आजमाईश हर वक्त जिंदगी
बस रह गया वजूद ही औकात के सिवा/4/
है दफ्न कहकहों में यहां ढेरों सिसकियाँ
बस शोर रह गये हैं सवालात के सिवा /5/
तेरा खयाल तेरी तलब तेरी आरजू
सब कुछ मिला है इश्क में मुलाकात के सिवा/6/
महफ़िल में रंग हुश्न थे जलवे तमाम थे
सब कुछ वहां था एक हंसी रात के सिवा/7/
यूँ तो वहां थे खूब बेशुमार आदमी
तन्हा मगर नही था कोई जात के सिवा/8/