1212 1122 1212 22
न पूछ जिंदगी जीने का फलसफा मुझसे
रहा हूँ बरसों-बरस खुद ही मैं जुदा मुझसे/1/
गुजारने हैं अभी और जाने दिन कितने
वो चाहते हैं अभी और वायदा मुझसे/2/
कदम कदम पे सितम वक़्त ने तो ढाया है
किया कभी न मुकद्दर ने भी वफा मुझसे/3/
यूँ चोट खाया है अपने पराए सबसे ही
किसी के वास्ते निकली न बद्दुआ मुझसे/4/
करें तो किससे करें अब कोई उम्मीद कहो
किया है यार सभी ने ही बस दगा मुझसे/5/
सहा है मैने ही जुल्मों सितम जहां भर के
क्यूँ फिर भी सबको रहा है सदा गिला मुझसे/6/
न अब उम्मीद कोई यूँ तो तेरे आने की
क्यूँ फिर भी बदला न नंबर कभी गया मुझसे/7/
ऐ जिस्म लौट चलो हिचकियाँ बुलाती हैं
है कुछ तो घर को भी उम्मीद आसरा मुझसे/8/
कि सेव करने के चक्कर में जल्दबाजी में
तुम्हारे फोन का नंबर डिलीट हुआ मुझसे/9/
तुम्हारे बाद यूँ कोशिश भी की नही मैंने
तुम्हारे बाद न रिश्ता बना नया मुझसे/10/
तेरी दुआओं में क्या अब तलक शरिक हैं हम
गज़ब है उनका अभी भी ये पूछना मुझसे/11/
तमाम घर का ही दारोमदार था मुझपे
किसी ने शहर से आने नही कहा मुझसे/12/
था मेरे सर पे बड़ा बोझ जिम्मेदारी का
रहा है दूर बहुत मेरा बचपना मुझसे/13/
बिचारी रात को कस कर के भींच मुट्ठी में
नया सा ख्वाब निचोड़ा नही गया मुझसे/14/
कल इक दिये को सहारा दिया था हाथों का
कि अब तलक हैं हवाएँ खफ़ा खफ़ा मुझसे/15/
अब आए कौन सी आफत खुदा ही खैर करे
बेइंतहा ही वो हँस हँस के है मिला मुझसे/16/
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