Monday, 22 March 2021

अब कोई आसरा ही नही है

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अब कोई आसरा ही नही है
इश्क वो जानता ही नही है

क्या निभाएगा वो रब्त हमसे
जो हमे सोचता ही नही हे

गर न खुद पे हो गुजरी बलाएँ
हादसा हादसा ही नही है

उसके जैसा मिला ही न कोई 
आदमी वो बुरा ही नही है

जब मिले तो गले ही लगाया 
दुनिया दारी जरा ही नही है

खो गयी सब मनौव्वल की रस्में
अब कोई रूठता ही नही है

तज़क़िरा कुछ करे वो हमारा
आज तक तो सुना ही नही है

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