1212 1122 1212 22
नही थी मंशा कोई उनकी मुस्कुराने की
हमी ने ठान ली जिद खुद को आजमाने की/1/
निगाह भर वो इधर देखने से डरते रहे
गजब थी उनकी अदा इस तरह लजाने की/2/
खयाल ख्वाब से या कि दरीचे दरवाजे
हजार रस्ते हैं चाहे अगर तू आने की/3/
सहेज रक्खा है क्या खूब शोखियों को हुजूर
कदम कदम पे है सरगोशियाँ जमाने की/4/
करें भी कैसे भला रूठने की कोशिश हम
उन्हे न आती कला रूठे को मनाने की/5/
कहो मुगालता इसको या इत्मिनान कहो
सनक है रात मुझे रात ही बताने की/6/
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