Monday, 22 March 2021

नही थी मंशा कोई उनकी मुस्कुराने की

1212 1122 1212 22 
नही  थी   मंशा   कोई   उनकी  मुस्कुराने की 
हमी ने  ठान ली  जिद खुद को आजमाने की/1/

निगाह  भर   वो   इधर  देखने  से    डरते रहे
गजब  थी  उनकी  अदा इस तरह लजाने की/2/

खयाल   ख्वाब   से  या  कि  दरीचे  दरवाजे
हजार  रस्ते  हैं    चाहे    अगर   तू  आने की/3/

सहेज रक्खा है क्या खूब शोखियों को हुजूर
कदम कदम  पे  है   सरगोशियाँ  जमाने की/4/

करें  भी  कैसे  भला रूठने की कोशिश हम
उन्हे  न  आती  कला  रूठे  को  मनाने  की/5/

कहो  मुगालता  इसको  या  इत्मिनान कहो
सनक  है   रात   मुझे   रात  ही   बताने की/6/

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