Monday, 22 March 2021

उलझे हुए खयाल में उलझा हुआ हूँ मैं

221 2121 1221 212
उलझे  हुए   खयाल  में   उलझा   हुआ  हूँ मैं
मुद्दत  से   अपने  आप  से   भी  लापता हूँ मैं/1/

कैसे   मै  अपनी   जात   बताऊँ   जहान  को
भीतर  से   सुर्ख   लाल  हूँ   बाहर   हरा  हूँ मैं/2/

बेशक   तुम्हारे  फोन  की   उम्मीद  कुछ नही 
फिर  भी   सहेज   क्यूँ   तेरे  नंबर  रखा हूँ मैं/3/

खोया था अब तलक तो मैं रिश्तों की भीड़ में 
अब  आदमी  की  जात   परखने  लगा  हूँ मैं/4/

मिलता  मेरे  मिजाज  का अब कोई भी कहाँ 
उम्मीद  पर  न  खुद  की भी उतरा खरा हूँ मैं/5/

No comments:

Post a Comment