Monday, 22 March 2021

कहर है बरपा हुआ दिलों में

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कहर है बरपा हुआ दिलों में
उदासियां  पसरी  है  घरों में/1/

न रोशनी की उम्मीद कोई
छिपा है सूरज भी बादलों में/2/

हो चाहे कितना भी वक़्त मुश्किल
कमी नही कोई हौसलों में/3/

कभी गुजर के जरा तो देखो
इबादतों की भी बस्तियों में/4/

उठे दुआओं में हाथ हजारों
तलब सभी की थी रोटियों में/5/

सियासतों का अहम है किरदार 
मेरे वतन की तबाहियों में/6/

है कुर्सियां खूब मुस्कुराती
लगे अगर आग बस्तियों में/7/

न रखते अब कोई दाना पानी
न आते पंछी ही अब छतों में/8/

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