एक दिन का ये कोई किस्सा नही
पर कहानी में मेरा चर्चा नही
मै ही हूँ बुनियाद हर तामीर की
पर हूँ मै मुद्दा कोई मसला नही
कोई गुंजाइश नहीं फिर भी मगर
आस का दरिया कभी सुखता नही
खो गये तुम ही जहाँ की भीड़ में
मैने तो अपना पता बदला नही
क्या पता क्या सोच कर मै आज तक
फोन से नंबर मिटा पाया नही
अब झिझकता हूँ गुजरते मैं उधर
रहगुज़र वो अब मेरा सपना नही
आ ही जाते हो खयालो जहन में
बख्श दो अब ये सितम अच्छा नही
जिंदगी है बे बहर बे काफिया
जिसका अपना इक अदद मिसरा नही
और कितने दर्द है पहलू तेरे
तू बता ऐ जिंदगी शरमा नही
किस्तों में क्यूँ मारती है रोज ही
ये तरीका जिंदगी अच्छा नही
है बड़े महफूज़ खासम खास सब
पर भरोसा बस पियादो का नही