Friday, 15 May 2020

होशियारी भी दिखाना चाहिए

होशियारी   भी     दिखाना   चाहिए
दौर    जैसा    पेश   आना   चाहिए
 
करने  लगता  है   जमाना  इस्तेमाल
कुछ  तो  लहजा  शातिराना  चाहिए

तालियों  से   पेट   तो   भरता   नही
पेट  खातिर   आबो   दाना    चाहिए

अर्जियों  से  काम  अब  चलता नही
सोये  सिस्टम  को   जगाना   चाहिए

ताब  कम  है  मुफलिसों  के  शोर में
चीखने  का  फन  भी  आना चाहिए

कुछ  इतर  कर  नफरतों  के  दौर में
दिल से  दिल  रस्ता  बनाना  चाहिए

रंजो गम   सबसे  छिपा करके मियां 
हंस के  मुश्किल को लजाना चाहिए

दर ब दर  रोने से क्या  हासिल भला
खूब   हंसना  और   हंसाना  चाहिए

अपनी   नाकामी   छिपाने  के  लिए
जिम्मेदारी    को    बहाना    चाहिए

मुफ्त  है    बदनाम    कोरोना   यहां
दोष  सिस्टम  पर  भी आना चाहिए

फासलों  के    फैसले  सब    तेरे  थे
वक्त  पर    इल्ज़ाम   आना  चाहिए 

कल न थी मरने तलक फुर्सत जिन्हें
आज   जीने   का   बहाना   चाहिए

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