होशियारी भी दिखाना चाहिए
दौर जैसा पेश आना चाहिए
करने लगता है जमाना इस्तेमाल
कुछ तो लहजा शातिराना चाहिए
तालियों से पेट तो भरता नही
पेट खातिर आबो दाना चाहिए
अर्जियों से काम अब चलता नही
सोये सिस्टम को जगाना चाहिए
ताब कम है मुफलिसों के शोर में
चीखने का फन भी आना चाहिए
कुछ इतर कर नफरतों के दौर में
दिल से दिल रस्ता बनाना चाहिए
रंजो गम सबसे छिपा करके मियां
हंस के मुश्किल को लजाना चाहिए
दर ब दर रोने से क्या हासिल भला
खूब हंसना और हंसाना चाहिए
अपनी नाकामी छिपाने के लिए
जिम्मेदारी को बहाना चाहिए
मुफ्त है बदनाम कोरोना यहां
दोष सिस्टम पर भी आना चाहिए
फासलों के फैसले सब तेरे थे
वक्त पर इल्ज़ाम आना चाहिए
कल न थी मरने तलक फुर्सत जिन्हें
आज जीने का बहाना चाहिए
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