Friday, 15 May 2020

कदम कदम पे तीश्नगी कदम कदम पे सिसकियाँ

कदम कदम पे तीश्नगी कदम कदम पे सिसकियाँ
है   कागजों  पे   राहतें    है   टेबलों  पे   अर्जियाँ

कदम कदम  पे  मुश्किलें  कदम कदम चुनौतियाँ
उठे   जरा सी   गल्तियों पे  यार हजार  उंगलियाँ

अंधेरी   बस्तियों  को   इंतेजार   है    उजाले  का
पर आफताब  की  अभी तो  चल  रही हैं छुट्टियाँ

अभी     जरा  सी    देर   है    पहुंचने  में    राहतें
सियासतें   पहुंच   गई  हैं   हादसों   तलक  मियां

हर इक शख़्स  वक्त का  गुलाम  ही तो  है जनाब
चली है कब  जहान में  किसी के मन की मर्जियाँ

बेचारगी  को   बेबसी  को   बेचते   खबर  नवीस
है  पेपरों  में  आजकल   यही  बनी  है   सुर्खियाँ

छिपी है ना उम्मीदी में भी इक किरण उम्मीद की
यकीन  है  निकल  ही  आयेंगी  कहीं से रश्मियाँ

है  उम्र भर के    तर्जुबो  की   हासिली  लकीरें यें 
यूँ  ही तो  आ गई  नही है  चेहरे  पर  ये   झुर्रियां

कहां  गयी   मुहब्बतों  की   वो   अजीम   दास्तां
क्यूँ फासले से रह गये हैं  अब दिलों के  दरमियाँ

दिखा है  फिर से  बरहना सा  चांद  आज राह में
किसी की बेबसी बनी  फिर आज देखो फब्तियाँ

क्यूँ  आ गये  ये दश्त के  रिहायशी  यूँ शहर अब
कि  मांगने  लगी  है खैर  अब  तमाम  तितलियाँ

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