कदम कदम पे तीश्नगी कदम कदम पे सिसकियाँ
है कागजों पे राहतें है टेबलों पे अर्जियाँ
कदम कदम पे मुश्किलें कदम कदम चुनौतियाँ
उठे जरा सी गल्तियों पे यार हजार उंगलियाँ
अंधेरी बस्तियों को इंतेजार है उजाले का
पर आफताब की अभी तो चल रही हैं छुट्टियाँ
अभी जरा सी देर है पहुंचने में राहतें
सियासतें पहुंच गई हैं हादसों तलक मियां
हर इक शख़्स वक्त का गुलाम ही तो है जनाब
चली है कब जहान में किसी के मन की मर्जियाँ
बेचारगी को बेबसी को बेचते खबर नवीस
है पेपरों में आजकल यही बनी है सुर्खियाँ
छिपी है ना उम्मीदी में भी इक किरण उम्मीद की
यकीन है निकल ही आयेंगी कहीं से रश्मियाँ
है उम्र भर के तर्जुबो की हासिली लकीरें यें
यूँ ही तो आ गई नही है चेहरे पर ये झुर्रियां
कहां गयी मुहब्बतों की वो अजीम दास्तां
क्यूँ फासले से रह गये हैं अब दिलों के दरमियाँ
दिखा है फिर से बरहना सा चांद आज राह में
किसी की बेबसी बनी फिर आज देखो फब्तियाँ
क्यूँ आ गये ये दश्त के रिहायशी यूँ शहर अब
कि मांगने लगी है खैर अब तमाम तितलियाँ
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