दौरे हालात है यही मैंने
नींद में की है शायरी मैंने
जिंदगी खैर मांगती है मियां
इस कदर जी है जिंदगी मैंने
तुमसे मिलकर ही खुद को जाना है
तुमसे सीखी है दोस्ती मैंने
एक अहसान बस तुम्हारा है
तुमसे पायी है हर खुशी मैंने
देख पाया नही मै दुनिया को
सिर्फ देखी है बेबसी मैंने
इक समंदर भी कम पड़े शायद
पाल रख्खी है तीश्नगी मैंने
शुक्रिया चांद का भी करना है
चांद से ली है रोशनी मैंने
No comments:
Post a Comment