मुसलसल दूरियाँ अच्छी नही है
जो हैं मजबूरियाँ अच्छी नही है
जरूरी फासले हो दरमियाँ पर
ये दिल के दरमियाँ अच्छी नही है
दिलों में गर खरासे रह गयी है
तो फिर वो यारियाँ अच्छी नही है
वो माँ लज्जो हया न देखती है
नजर बद उरियाँ अच्छी नही है
कभी कर लो पडोसी से भी चर्चा
बगल में सिसकियाँ अच्छी नही है
कभी तो हाथ कांधो पर भी रख्खो
सदा ही तालियाँ अच्छी नही है
पशेमां हो रही है आदमीयत
वो हो अब सुर्खियाँ अच्छी नही है
है चर्चा बेबसी का हर कदम पर
फिर उसपे फब्तियाँ अच्छी नही है
बिलखती जिंदगी भूखी मिलेगी
यहाँ पर लोरियाँ अच्छी नही है
है समझौते जरूरी जिंदगी में
मुसलसल खामियाँ अच्छी नही है
मुहब्बत है बहुत वाजिब जरुरत
दिलों में तल्ख़ियाँ अच्छी नही है
किसी का दिल दुखा कर मत मजे लो
अब ऐसी मस्तियाँ अच्छी नही है
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