दरमियाँ यूँ भी हादसा गुजरा
फिर कहाँ कुछ भी ख्वाब सा गुजरा
दिल को तेरी तलब ही ऐसी थी
आखिरी हश्र इब्तिदा गुजरा
सुर्खियां बनती बेबसी अब तो
फब्तियों में ही तब्सिरा गुजरा
मुश्किलों में यूँ जिंदगी गुजरी
इक गया फिर ये दुसरा गुजरा
आरज़ू जिनसे रहनुमाई थी
वो मेरा वक्त मौन सा गुजरा
हौसले ओढते बिछाते हुए
सर्दियों का जो दौर था गुजरा
आस बन के ही रह गई दुनिया
दौर अच्छा भी राएगा गुजरा
हसरतें शामियाना ढुंढती है
चाह अक्सर ही बेरिदा गुजरा
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