Friday, 15 May 2020

दरमियाँ यूँ भी हादसा गुजरा

दरमियाँ    यूँ   भी   हादसा   गुजरा
फिर कहाँ कुछ भी ख्वाब सा गुजरा

दिल  को  तेरी  तलब  ही  ऐसी  थी
आखिरी    हश्र     इब्तिदा    गुजरा

सुर्खियां   बनती    बेबसी   अब  तो
फब्तियों    में   ही   तब्सिरा  गुजरा

मुश्किलों   में   यूँ   जिंदगी   गुजरी
इक  गया   फिर  ये   दुसरा  गुजरा

आरज़ू     जिनसे     रहनुमाई   थी
वो   मेरा    वक्त   मौन  सा  गुजरा

हौसले     ओढते      बिछाते    हुए
सर्दियों  का    जो  दौर  था  गुजरा

आस  बन  के  ही  रह गई  दुनिया
दौर   अच्छा    भी   राएगा  गुजरा

हसरतें    शामियाना       ढुंढती  है
चाह   अक्सर    ही   बेरिदा गुजरा

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