Friday, 15 May 2020

न मंदिर न मस्जिद के ही वलवले पर

न मंदिर  न मस्जिद  के ही वलवले पर
मिला  रब  न  हमको  किसी  रास्ते पर

ऐ  वाईज  चलो  मयकदे   ढूंढ ले  अब 
सुना है कि मिलता है  सब इस पते पर

किसे  होश  में  रब  मिला है  कभी भी
जो  बेहोश था  रब दिखा  बस उसे पर

यूँ  पसरी  है  खामोशियां  हर तरफ ही 
लगी   जैसे     पाबंदियां    बोलने   पर

लगी  चीखने  दर  दिवारें  भी  अब  तो
है   शर्तें   यहां   लागू  मुंह  खोलने  पर

कहीं   भीड़ में   खो  गया  यार  अपना
मिले  अब  कहाँ  देखे किस मरहले पर 

लिये  हाथ   खंजर  फिरे  है   यहाँ  सब
मिले  लोग  जितने  गजब  ही मिले पर

भला  क्या  नया कुछ दिखायेगा ये अब
मचलने  लगा  क्यूँ है  दिल  आईने  पर

हवाएं  भी  बदली सी है  शहर की कुछ
अदब  तौर   तहजीब   है   हाशिये  पर

ये  इंसानियत  हर कदम ही है लज्जित 
पशेमां   नही    कोई   अपने  किये  पर

तड़पता  रहा  जब तलक जिस्म घायल
बने   खूब   विडियो    वहां  हादसे  पर

बहुत  सोच कर  ही कदम कुछ उठाओ
नजर  हैं   कोई   तेरे   हर   फैसले   पर

सलीका   हमे   अब   सिखाने  चला  है
न अफसोस जिसको है अपने किये पर

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