सिसकती बस्तियां घर बार देखने के लिए
कोई नही है ये चीत्कार देखने के लिए
तबाहियों के ये मंजर डराते है बेहद
क्यूँ मुब्तिला है ये सरकार देखने के लिए
बहुत शरीफ हैं संगत भलो की करता है
वबा गया नही मयख्वार देखने के लिए
न जीते जी तो अयादत कभी किया साहब
वो बन गये अभी हकदार देखने के लिए
अदू हमारा है उद्दंड खूब शातिर है
वो इज्तिराब है यलगार देखने के लिए
बहुत करीब से गुजरे हमारी बस्ती से
मगर न आए वो बीमार देखने के लिए
है चीख राएगा बहरो के शहर में लोगों
न आएगा कोई भी यार देखने के लिए
सुखनवरो के दिलों को खंगाला जब हमने
कुछ अधजले मिले अशआर देखने के लिए
बला का दर्द उढ़ेला है गज्ल गोई में
कि कौन कितना है गमख्वार देखने के लिए
कभी जो जिंदगी की धूप ने सताया मुझे
निकल पड़ा मैं भी खुद्दार देखने के लिए
जमात जात है पर आदमी नदारद है
कहाँ को जाए भला प्यार देखने के लिए
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