नही मिलती कोई खुशी
अब
तुम्हे देखकर
उदास हो जाता है मन
वक्त की परतो के नीचे दबे
लम्हे
तेरी यादों के झोंके से
निकल आते है बाहर
बहुत दुखता है
मन के भीतर कुछ
जब भी तुझसे
निगाहें टकराती है
आजकल
फिर से उन लम्हों को
जीने को
लालायित हो उठता है
ये बावरा मन
दबाना पड़ता है
सीने में ही
बेलिबास हसरतों को
बहुत समझाना पड़ता है
खुद को
अब तुझमे कोई
बस नही रह गया है मेरा
मगर ये जो तेरी यादें हैं
ये मेरे बस मे नही
आ ही जाती है
गाहे ब गाहे
मुझसे
इजाजत लिए बगैर