Monday, 7 February 2022

संशय की बात है न कोई डर की बात है

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संशय  की  बात  है   न  कोई  डर  की बात है
लहज़ा   बदलना   आपके   नेचर  की  बात है/1/

मौसम  की  तरह  अब तो  बदलते  मिज़ाज हैं
मिलना  किसी  का  शाद  मुकद्दर  की  बात है/2/

देखा नही कभी भी बस उस शख्स को उदास
अद्भुत   अजब   अचंभा  कलंदर  की  बात है/3/

मुट्ठी  बंधी  थी   आया     खुले  हाथ  है  गया 
जग  जीतने   के  बाद   सिकंदर   की  बात है/4/

मंजिल को क्या खबर है  सफर के थकान की
चर्चा  न  आबलो  की   न  नश्तर  की  बात है/5/

समझे जो  मन की पीड़ा  व्यथा वो है आदमी
बाकी  तो   सिर्फ  भीड़ है  लश्कर की बात है/6/

जिसका  विचार   मर  गया   मुर्दा  है  आदमी
जिंदा  विचार  भी  तो  मगर  डर  की  बात है/7/

चरबा  रहा  है   शौक  से   चारा    कसाई का
बकरा  है  बेखबर  कि   यहाँ  सर  की बात है/8/

आकर   नहाये   और    नहा कर    चले  गये
ये फलसफा है जीस्त का  अवसर की बात है/9/

लहज़ा  मिज़ाज  नाज़  नज़रिया  बदल  गया
बदले  समय के  साथ  ये  अक्सर की बात है/10/

बच्चों  की  भूख  अम्मा  की  पाजेब खा गयी
क्या क्या शिकम न खा गयी तेवर की बात है/11/

कब तक  इन्हें  पिलाएंगे  पत्थर  उबाल कर
झूठी  तसल्लियाँ  भी  तो  महशर की बात है/12/

थोड़ा है थोड़े की जरूरत है

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थोड़ा  है    थोड़े   की    जरूरत है
जिंदगी    फिर    भी    खूबसूरत है/1/

ख्वाब   बिन     जिंदगी    अधूरी है
ख्वाब  मिल  जाए  जीस्त जन्नत है/2/

खाक  है  जिस्म   खाक  है  दौलत 
राएगाँ    नाम     ठाठ    शोहरत है/3/

रोज  रोते   नया   ही   मातम  इक
दौर   सहमा   डरा   है   आफत है/4/

अजनबी  की  तरह मिली है मगर
जिंदगी     आखिरी      जरूरत है/5/

हर कदम  पर  नयी  मुसीबत इक
हर कदम पर  ही  बस कयामत है/6/

सांस  के  बदले  जिंदगी  है मिली 
जिंदा  रहना   महज    रवायत है /7/

दूर  से   ही   भली    लगे  है बस
दर असल जिंदगी एक आफत है/8/

रोज़  देती   नया   प्रलोभन   इक
हर कदम    जिंदगी    नसीहत है/9/

छोड़ जाता है वक़्त अपने निशाँ
वक़्त ही  एक  बस   हकीकत है/10/

जीस्त   जद्दोजहद  में  उलझी है
अब कहाँ  शायरी की  फुरसत है/11/

दिन  निकलता  है  रात  होती है
जी   रहे  हैं    यही    गनीमत है/12/

कुछ न  पहचान  मेरी  तेरे सिवा
कितनी गुमनाम  मेरी शोहरत है/13/

जब से ओहदों पर ही शोहदों की बहाली हो गयी

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जब से ओहदों पर ही शोहदों की बहाली हो गयी
हर  नजरिया  हर  व्यवस्था  जैसे  गाली  हो गयी /1/

बेबसी     लाचारगी   पर     मौन   है   इंसानियत
दावेदारी    हर  तरक्की  की     सवाली  हो  गयी/2/

रहनुमाओं   के  इशारों  पर   चली  है   भीड़  जो
ओढ़ कर  चोला  शराफत  का  मवाली  हो  गयी/3/

हैं  चकित  अपने  दुखों  से  बे असर है सान्त्वना
हर  तसल्ली  हर  दिलासा  जैसे  खाली  हो गयी/4/

मर  चुकी  है  ख्वाहिशें  तो  मुद्दतों  पहले  हुजूर
आखरी  उम्मीद  मन  में  थी  वो  जाली हो गयी/5/

वक़्त  ने  हर  वक़्त  परखा है  बड़ी शिद्दत से ही
रो लिए कुछ पल कभी हँस कर दिवाली हो गयी/6/

कोई  शिकवा  या  गिला  हमको मुकद्दर से नही
जिंदगी  ये   वक़्त  की  मर्ज़ी  बिता ली  हो गयी/7/

मिजाज सख्त जिगर से कड़े नही होते

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मिजाज    सख्त    जिगर   से   कड़े  नही होते
कभी    जुबान  पे     शिकवे   गिले   नही होते/1/

उठाए   फिरते  हैं   सर अपने  जिम्मेदारी बहुत
बड़े    जो    होते  हैं     यूँ  ही   बड़े   नही होते/2/

अजीब   काफिले    ये   ख्वाहिशों  के   होते हैं 
वहीं  से     गुजरे      जहाँ     रास्ते   नही  होते/3/

तमाम  उम्र   ही    रिश्ते      जरा जरा    करके 
सुलगते   रहते  हैं   बस    राख   ये  नही  होते/4/

तलाश   शौक  को   होता है  साधनों का सदा
जहाँ  पे    चाह  हो   मसले   खड़े   नही  होते/5/

कभी  तो  देखिये  दिल को टटोल करके जरा
यूँ  बे वजह   ही   कहीं    फासले   नही  होते/6/

सितारे  चांद  ये  खुश्बू  शफ़क़  धनक जुगनू 
गर  आप   होते    तो   बेकार  से    नही होते/7/

अंधेरे  स्वार्थ   न  होते    जो    चंद  लोगों के
कहीं भी  मुल्क  में  कुछ  मसअले  नही होते/8/

भरोसा   चाहते  हैं    रिश्ते     एक  दूसरे का
कभी  भी  मौके के   मोहताज  वे  नही होते/9/

दिखाते खुद को हैं जितना शरीफ लोग यहाँ
हकीकतन   में  वो    उतने  भले   नही होते/10/

अब किसी के बस्ते में चकरियाँ नही मिलतीं

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अब  किसी  के  बस्ते में   चकरियाँ  नही  मिलतीं
बीच में   किताबों  के     तितलियाँ  नही  मिलतीं/1/

मग्न  है  मोबाईल पर  आजकल हर इक बचपन
अब  गली  मुहल्ले  में     टोलियाँ   नही  मिलतीं/2/

हर  तरफ़   उदासी  है   खौफ़ तर    दिखे  मंजर
आजकल   किसी  चेहरे   मस्तियाँ  नही  मिलतीं/3/

नींद  आ  ही  जाती  है  चाहे जिस मशक्कत पर
सर  पे  माँ  के  हाथों  की थपकियाँ नही मिलतीं/4/

हर  खुशी  हुई  हासिल    पैसों  की  बदौलत पर
दाम   कोई   भी देकर     लोरियाँ   नही  मिलतीं/5/

भूख  तो    मिटा   लेते     होटलों  में     ढाबों में
माँ के हाथों  की   लेकिन  रोटियांँ  नही  मिलतीं/6/

स्वार्थ  में  ही  बनते  हैं    सारे   रिश्ते  नाते अब
दिल में अब उतर दिल की  यारियाँ नही मिलतीं/7/

हर कदम  पे  देती है  इक  नया  सबक हर दिन
जिंदगी के  मकतब  में   डिग्रियांँ   नही  मिलतीं/8/

घर  बिका है बाबुल का  बालियाँ  बिकी माँ की
बेटियों  की   सस्ते  में   डोलियाँ   नही  मिलतीं/9/

रात दिन ही कचोटे मन पापा

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रात दिन   ही  कचोटे   मन  पापा
कर न   पाए   तेरा    जतन  पापा/1/

कुछ समय  और   साथ   रह लेते
पास  होता  अगर  जो  धन पापा/2/

आंखें  भर   आयीं  याद आते ही
लग  रहा है    अधूरा पन    पापा/3/

जिम्मेदारी    निभाई   तुमने  सब
ना  हुए  हमसे   तुम  वहन पापा/4/

धूप भी    छांव भी   बुरा  अच्छा
बच्चों  खातिर  किये सहन पापा/5/

खुद को भूले हमारी खातिर तुम
हम रहे  खुद में  ही  मगन पापा/6/

एक  अफसोस  रह  गया मन में
सोच ते   बह  रहे    नयन  पापा/7/

आपकी   वरदहस्ती  में  गम का
कर  न  पाए हम आंकलन पापा/8/

पास रहते  न  अहमियत  समझे
अब बिछड़ कर  करें रुदन पापा/9/

हँसते दिखना भी इक रवायत है
आजकल  का है ये चलन पापा/10/

खंडहर जैसे भला घर में कौन रहता है

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खंडहर  जैसे   भला  घर में   कौन  रहता है 
आप  बाहर  हैं  तो  भीतर में  कौन रहता है/1/

लोग  सारे  यहां  पत्थर  की तरह दिखते हैं 
शोर  फिर  कैसा है  मिंबर में  कौन रहता है/2/

जह्न के  साथ  दिखी कब जुबां तेरी ये बता
दिल  तेरे  कौन  है  ठोकर  में कौन रहता है/3/

संग  कितनी  ही  दुआएँ  भी  तेरे  चलतीं हैं 
तूने   देखा  कहां  लश्कर में  कौन  रहता है/4/

राह तकती है वो दहलीज तेरा आज तलक
ढूंढता  किसको  तू  दर दर में कौन रहता है/5/

रोज़  दम  तोड़ती  उम्मीद  आरज़ू   हसरत 
हर समय  कहकहों के घर में कौन रहता है/6/

कौन  देता है भला  साथ  उम्र भर  के लिए 
ये खुदा जाने  कि अवसर में  कौन रहता है/7/

बात निकली है फिर जमाने की

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बात  निकली  है   फिर  जमाने की
रंजो गम    की      नये    पुराने की/1/

जिक्र   उनका    जरूर   निकलेगा
बात  फिर  होगी  दिल   दुखाने की/2/

वो  मेरे  साथ  ही  थे  जब  उनकी
थी  खबर   आयी   लौट  आने की/3/

जिंदगी   छोड़ती   न    कोई कसर 
है  किसी  को  भी    आजमाने की/4/

नाज़  नखरे      बड़े     दिखाती है 
इसकी  आदत  है   रूठ  जाने की /5/

जिंदगी  का   तो   रोज़  का  है  ये 
अपनी  फितरत   नही   मनाने की/6/

दिल ने   उम्मीद    छोड़  दी   तेरी
अब   जरुरत   नही      बहाने की/7/

गर न था दिल में कुछ तो कह देते
बात  ये  तो   न  थी    छिपाने की/8/

क्या  हुआ  गर   बुरा  है  रहने दो
अब न  कोशिश हो  बरगलाने की/9/

कुछ  न  होगा   कुरेद  जख्मों को
हमको  आदत  है    मुस्कुराने की/10/

तंग अब  आ गये हैं सुन सुन कर
मत  करो  बात  दिल  दुखाने की/11/

मिल गये  यार  जब  नये  तुमको
क्या  जरुरत है  अब    पुराने की/12/

रूठ  तो  जाएं  पर ये मुश्किल है
उनकी  आदत  नही   मनाने की/13/

चाह  उट्ठी  है  दिल  में हँसने की
कुछ तो  दो  वज्ह  मुस्कुराने की/14/

घर में   उम्मीदें    राह  तकती हैं 
फिर जरूरत है  इक फसाने की/15/

आप   कहते  हैं   तो   न  रोयेंगे 
जिद  करो  अब न मुस्कुराने की/16/

कोई  उम्मीद मत किसी से करो
वज्ह  बनती  है  ये   रुलाने की/17/

आदमी होता है इंसान जरा होता है

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आदमी   होता    है         इंसान     जरा    होता है
साथ  नयी  सुब्ह  के   हर  शख्स      नया होता है/1/

कद्र     किरदार   की    होती  है     हमेशा   वरना 
कद  में  इंसान  से      साया   ही     बड़ा  होता है/2/

खत्म  हो  जाता  है   दिन भर  में   कई  किस्तों में
शाम तक   खुद  में  भी  वो  कुछ  न बचा होता है/3/

कोई  चिथड़ों  से  छिपाता  है   बदन  अपना यहाँ 
हो के  नंगा    कोई       मशहूर    बड़ा    होता  है/4/

दर्द  देते  हैं   वही   जिनको  भी   समझो  अपना
आजकल  कौन    किसी  का  भी    सगा होता है/5/

आंख  अब  मूंद  के   यूँ  कर  लें  भरोसा किसपे
बात  पे  अपनी      यहाँ     कौन     खरा होता है/6/

देख  पाता    नही  है    अच्छे  बुरे     का   अंतर
अक्ल में  जब   कोई    पत्थर  सा  पड़ा होता है/7/

भूल  जाता  है  बशर    ऐसी  दशा  में   खुद को
सर पे  जब   उसके     बुलंदी  का  नशा होता है/8/

मेरे   हिस्से    की    ही    देना    मुझे    मेरे ईश्वर
छीनकर  हक  किसी  का किसका भला होता है/9/

काम जब भी पड़ा कुछ काम निकल आया उन्हें
कौन  अब  किसके   मुसीबत में   खड़ा  होता है/10/

जेब  खाली  मिले  हैं   उनके  यहाँ  पर  अक्सर 
ऐसा   इंसान   जो  कि   मन  से   भरा   होता है/11/

अहमियत  भूख  की  उसको  ही  पता  होती है
टुकड़े टुकड़े  को  जो  शिद्दत  से  लड़ा  होता है/12/

फलसफा  जिंदगी  के  यूँ  न  सुनाओ  उसको 
जिंदा  रहने  को  जो  हर पल  ही  मरा होता है/13/

दास्ताँ  कैसी  सुनाएंँ  तुम्हें  दिल  कुछ तो बता
तेरी  हर  बात  पर  इक   जख्म   हरा  होता है/14/

अब तो बस बेकार की बातें होती हैं

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अब  तो  बस  बेकार की  बातें होती है
बे मतलब   तकरार  की   बातें होती हैं /1/

लगती थी  चौपाल  कभी  बरगद नीचे
अब  गुजरे  गुलजार  की  बातें होती हैं /2/

यूँ तो तुमसे यार बहुत कुछ  कहना था 
लेकिन  बस  व्यापार की बातें  होती हैं /3/

कुछ  बातों  पर   पर्दा दारी   अच्छी है 
कुछ इज्जत संस्कार की  बातें होती हैं/4/

रिश्ते  नाते  घर  पर  अब   मुरझाते हैं
मोबाइल  पर  चार  की   बातें होती हैं/5/

उम्मीदों   से  ही      उम्मीदें    होतीं हैं
उनसे  ही  बस  प्यार की बातें होती हैं/6/

आंसू पीकर  भी  चुप  रहना पड़ता है
हँसकर बस व्यवहार की बातें होती हैं/7/

जीवन में  समझौता  करना  पड़ता है
हर पल  ना गुलज़ार की बातें होती हैं/8/

चलना सीखा और घरौंदा छोड़ दिया
ये  मतलब के  यार  की बातें होती हैं/9/

अपना अपना हिस्से का सब जीते हैं
कहने  को  संसार  की  बातें होती हैं/10/

ईश्वर  से   अब  सौदे बाजी  होती है
कब उनसे उपकार की बातें होती हैं/11/

देखने भर को ही गुलज़ार लिए फिरता है

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देखने  भर  को  ही   गुलज़ार  लिए फिरता है
हर  कोई  दिल में   बहुत  रार  लिए फिरता है/1/

हर  रवायत  ही   निभाता  है   बड़ी शिद्दत से 
आदमी   साथ  ही   व्यवहार  लिए फिरता है /2/

सुब्ह  से  शाम तलक दिल है जरूरत के बस
चलता  फिरता  कोई   बाजार लिए फिरता है/3/

प्रेम  छूता  है   हृदय  को  ही   सदा  पहले तो
देह  तो   बाद में   हकदार     लिए  फिरता है/4/

जिंदगी   कैद   जहाँ   चार   दिवारों   में   हुई
शह्र  ऐसा     गुले  गुलजार   लिए  फिरता है/5/

दे   दुहाई   कोई   लाखों   यहाँ  पे  छप्पर के
हुक्मराँ  जह्न  में    मे'आ'र    लिए फिरता है/6/

देख  मंजर  जहाँ   खामोश  हुए  शब्द  सभी
वक़्त  पहलू  में  वो  असरार  लिए फिरता है/7/

बादशाही  को   जरा   कम  है   दिखाई देता
अपनी आंखों में वो  लश्कार लिए फिरता है/8/

आइना  सामने  बस अपने कभी रखता नही
आदमी  दुनिया का अखबार लिए फिरता है/9/

फायदे   देख    जहाँ     होती  है    नातेदारी
दिल है अहमक वहाँ पे प्यार लिए फिरता है/10/

कौन मिलता है किसी से भी यहाँ बे मकसद 
कुछ न कुछ हर कोई दरकार लिए फिरता है/11/

मे'आ'र - स्तर प्रतिष्ठा
असरार - भेद राज
लश्कार - चमक

थी हमारी चाह ऐसी हमें गम मिले जरा सा

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थी  हमारी  चाह  ऐसी   हमें   गम  मिले जरा सा 
मिला गम हमें फिर इतना कि न हम बचे जरा सा /1/

कभी रोये दिल ही दिल में  कभी आंसू हम बहाए 
कभी गम छिपाने  हँसते से भी हम दिखे जरा सा /2/

कभी जान कर  हकीकत   रहे  ख्वाब में ही खोये 
टूटे  ख्वाब सब  कदम जब पड़े शम्स के जरा सा /3/

कहें  अब  कसूर  किसका   ये  नसीब  है  हमारा
सभी  लोग  अच्छे हैं  बस  बुरे हम ही थे जरा सा /4/

हम उठाये  नाज  उनके    हैं सदा ही हंसते हंसते 
हो गये  खफा  जो  किस्से    सुने दर्द के जरा सा /5/

सभी  पूछते हैं  हमसे    इन उदासियों  के किस्से 
किसी को  न  दर्द दिखता कभी चेहरे पे जरा सा /6/

उन्हे  तो  लगे है  अपने  दिये हर सितम ही थोड़े 
तभी  हैं  सताते  ज्यादा   और   पूछते   जरा सा /7/

हमें कह रहें वो कच्चे  अभी हो बहुत ही दिल के 
किया  इश्क  है  अगर  तो  रहो  दर्द में  जरा सा/8/

उम्मीद का इक दिया जला है बहुत अंधेरा

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उमीद  का  इक  दिया  जला,    है बहुत अँधेरा
कहीं  से  जुगनू  ही  मांग  ला,    है बहुत अँधेरा/1/

जले है  ईर्ष्या  की आग सबके ही मन के भीतर
कि  जामे उल्फत  इन्हें  पिला,  है  बहुत अँधेरा/2/

नमी है  आंखों में  आज  जाने  क्यूँ सुब्ह से ही
गया  जो  उसको  तू  भूल  जा, है बहुत अँधेरा/3/

हुआ  करे   है  अगर   जो   चारों  तरफ  हमारे
न  मुश्किलों  से   हमें  डरा,      है बहुत अँधेरा/4/

उधार  की   रौशनी  में    कैसा   मचल   रहा है
ऐ चांद  अपनी  न  हद  भुला,   है बहुत अँधेरा/5/

मचल  रही    बिजलियाँ   चमकदार  पैरहन में
चिराग  खामोश   दिख  रहा,   है  बहुत अँधेरा/6/

हमें  मुहब्बत  की एक भी  वज्ह मिल न पायी
तू   रूठने  की   वजह  बता,  है  बहुत अँधेरा /7/

ये अश्क आंखों से यूँ नही बस निकल हैं आए
उतावला  मन   मचल  रहा,    है  बहुत अँधेरा/8/

जब भी मिले हैं बस वही बेकार की बातें

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जब  भी  मिले  हैं  बस  वही  बेकार  की बातें 
बे वज्ह  की   फिजूल की   तकरार   की बातें /1/

होती  नही  है   चर्चा  कोई   अम्नो सुकून की 
अरसे से    सुनी   ही  नही   है  प्यार की बातें /2/

बेरंग सी   लगने   लगी  हैं   अब  तो फिजाएँ
मिलती  कहाँ है  सुनने को  गुलजार की बातें /3/

बस्ती का वो चुल्हा भी तो अवकाश पे है अब 
कैसे  वहां  पे   हो   कोई   त्योहार   की  बातें /4/

फुटपाथ  पे  होती  है   बसर  जिंदगी  लाखों 
सुन  रक्खी  है  हमने  बहुत घर बार की बातें /5/

दिन रात  बदलते ही  बदल  जाते हैं किरदार 
कैसे  भला  हो  अब  कहीं  किरदार की बातें /6/

वादे  ही   खिलाती  है    हुकुमत  तो  हमेशा 
हर बार   लगी   झूठ  है   सरकार   की बाते/7/

चलती है रसूखदार की  हर दौर में हर वक़्त 
सुनता  है  भला  कौन   ये  लाचार  की बाते/8/

कहीं गम कहीं पे सुकून है

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कहीं  गम  कहीं  पे  सुकून है... 
कहीं बारिशों   का    जुनून है... /1/

कहीं   भीगते   से  है   झोपडे... 
कहीं   मस्तियों   के  ही टून है... /2/

कहीं दरिया बहती है आंख से... 
कहीं     ख्वाब  में  एक मून है... /3/

यहां  मुर्दे  बसते है  बस  मियां... 
हुए  माफ   सारे   ही    खून है... /4/

जरा  लफ्ज़  अपने   तरासिये... 
यूँ  है   चुभते   ज्यूं    नखून है... /5/

इन अदालतों  में   न  न्याय है ... 
यहां  पर  चले      टेलिफून है... /6/

कहीं  चिथड़ो   में  है   जिंदगी ... 
कहीं   चिथड़ो     का  शुगून है... /7/

कहीं   नालियों   में   अनाज है... 
कहीं    भुखमरी  के   फुनून है... /8/

ये  तरक्कियों  का  जो  दौर है...
सभी  शख्स अपनी  ही धून है.../9/

कौन अच्छा यहाँ है बुरा कौन है

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कौन  अच्छा   यहाँ    है  बुरा  कौन है
आजकल  इतना  सब देखता कौन है/1/

एक ही  शख्स में  अब  कई शख्स हैं
कैसे  पहचानें   कोई    खरा   कौन है/2/

हर नजर  ही  बुलंदी पे आकर टिकी
आबले  पांव  के       पूछता  कौन है/3/

दर्द  यूँ  जिंदगी  में  हैं  मिलते  बहुत
मुस्कुराना  मगर      छोड़ता  कौन है/4/

मुझसे बढ़कर भी जो जानता है मुझे
मुझमें  ही और मेरे  सिवा     कौन है/5/

ढो रहे अपने कांधो पे  अपने ही शव
हो  मुसीबत   अगर   पूछता  कौन है/6/

कुछ तो होंगी यकीनन ही मजबूरियाँ
वरगना  जीस्त में   बेवफा    कौन है/7/

खामियाँ  यूँ तो तुझ में भी है जिंदगी 
पर  तुझे  यूँ  परखता  भला  कौन है/8/

इक  दिसंबर  पे  कुर्बां  हुआ साल है
वक़्त  मरता  नही  कह रहा  कौन है/9/

फिर तमाशा नया इक खड़ा कर दिया

212 212 212 212 
फिर  तमाशा  नया  इक  खड़ा  कर दिया
जिंदगी   ने  तो  अब   रोज़ का  कर दिया/1/

सामने    मुश्किलें   आ   खड़ी    हो गयीं 
कुछ  जरूरत ने  पहले   बड़ा  कर  दिया/2/

नाम  से     लोग      पहचानते    हैं  उसे
इतना  मशहूर   इक  हादसा   कर  दिया/3/

मुझसे   ज्यादा  कभी   जानता था  मुझे
पूछ  गम की वजह  दुख  हरा कर दिया/4/

हो गयी  तन  के  जब भी जरूरत खड़ी
तो  समर्पण  वहीं  हर  मजा  कर  दिया/5/

भूख को   चाहिए   रोटियां    बस  मिले
शौक  ने  स्वाद का  चोचला  कर  दिया/6/

बह गये आज फिर उसकी यादों में हम
वक़्त ने  सब मजा किरकिरा कर दिया/7/

छिप  गये थे   लिबासों  में  किरदार तो 
सोच ने   ही  उसे   बरहना   कर  दिया/8/

धर्म ने   मार्ग  दिखला  दिया  सत्य का
कर्म ने  पथ सुगम  कुछ मेरा कर दिया/9/

शाख पर शम्स खिलते थे कल गांव में
बिल्डिंगों  ने  अंधेरा   बड़ा  कर  दिया/10/

प्रेम तो  बांट कर  खुश  हुआ  है  सदा
स्वार्थ ने  हर किसी को  बुरा कर दिया/11/

दर बदल जाते हैं दीवार बदल जाते हैं

2122 1122 1122 22
दर   बदल  जाते हैं   दीवार   बदल  जाते हैं
देखते  देखते      घर बार     बदल   जाते हैं/1/

शख्सियत की न रही कोई यहाँ कीमत अब
हल्के  औकात  से   बाजार   बदल  जाते हैं/2/

शह्र का शह्र  फकत अजनबी सा दिखता है 
देख  हालात    तरफदार     बदल   जाते हैं/3/

सच के सौदे मे न बरकत  ही रही अब कोई 
गर हो  नुकसान  तो  व्यापार बदल जाते हैं/4/

घर के आंगन में है इक दोस्त शजर बुढ़ा सा
चैन  मिलता  वहीं  जब  यार  बदल जाते हैं/5/

बाप से मिलने को भी  लेनी इजाजत है पड़े
हो  बिदा  बेटी के   हकदार    बदल जाते हैं/6/

मेरी  बस्ती  में  भी   रहते हैं   शनाशाई  मेरे
देख  मुश्किल  घड़ी  किरदार बदल जाते हैं/7/

माफ  करना  मेरे  बच्चों  को  हे  ईश्वर  मेरे 
जिम्मेदारी  से   सरोकार    बदल    जाते हैं/8/

ये अकीदा   ये  इबादत  है   किताबी  बातें
गर  न हो  मन की तो दरबार बदल जाते हैं /9/

आजकल  सुर्खियों  की  उम्र बहुत थोड़ी है
रात और दिन में ही  अखबार बदल जाते हैं/10/

हो  उजागर  भला  अब  कैसे समस्या कोई 
कार  मिलते ही  कलमकार  बदल  जाते हैं/11/

अब कहाँ यार वाफ़र बैठते हैं

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कहाँ  अब  यार   वाफ़र   बैठते हैं
हैं  सब  मशरूफ  कमतर बैठते हैं/1/

सभी की अपनी अपनी उलझनें है
उन्ही  के  साथ   अक्सर  बैठते हैं/2/

बड़ी चौपाल  लगती थी यहाँ कल
पर अब  कोई   न  बाहर  बैठते हैं/3/

जहाँ पर मैं रहूँ और  तुम रहो बस
किसी  ऐसी   जगह  पर  बैठते हैं/4/

बहुत   शोरो  शराबा   है  यहाँ पर
यहाँ  से   दूर   चल कर   बैठते हैं/5/

चलो आओ कभी फुर्सत मिले तो 
मिले  कुछ चैन  पल भर बैठते हैं/6/

बड़ी  जद्दोजहद है  कशमकश है
चलो  रंजिश  भुला कर  बैठते हैं/7/

वाफ़र - अत्यधिक

बेचैन दिख रहा है सबको हँसाने वाला

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बेचैन     दिख  रहा  है     सबको  हँसाने  वाला
खामोश है   बहुत  क्यूँ    लोरी    सुनाने   वाला/1/

बढ़ने  लगी   जरूरत    और   जेब    छोटे होते
उलझा है  कशमकश में   घर को  चलाने वाला/2/

अब टालें  कैसे ख्वाहिश और  कौन सी जरुरत 
है   इस   उधेड़बुन  में     बाजार    जाने  वाला/3/

बूढ़ा  दरख्त  आंगन  में    है  खड़ा  अभी  तक 
यादें  बची  है  उसकी  गायब  है    लाने  वाला/4/

बांधा था  एक झूला  शाखों में  कल  शज़र के 
कितना  सुखद था  लम्हा  मन गुदगुदाने वाला/5/

इस शहर में  थी अपनी भी  कुछ अजीज यारी
रस्ता  बदल  गया अब  उस  ओर  जाने वाला/6/

बनने  लगे हैं  रिश्ते  भी   नाप तौल  कर  अब
बस  रस्म है   न  कोई   इनको   निभाने वाला/7/

हमारे दरमियाँ अब व्यर्थ के किस्से नही होते

1222 1222 1222 1222 
हमारे  दरमियाँ   अब  व्यर्थ  के   किस्से   नही  होते
हुई  है  बंद    जब  से   गुफ्तगू    झगड़े   नही  होते/1/

सफर में साथ रख लो याद कुछ अच्छे दिनों की भी
समय  के  पास  मोहलत  के  कोई  लम्हें  नही होते/2/

जिसे  अपना  कहा  हमने  कभी  अपना नही होता
बुरे  निकले  सदा  हम  ही  कभी  अच्छे  नही  होते/3/

मुसीबत  के  समय  हिम्मत  बने  दे हौसला सबको
कहीं  सय्यास  भी   अब   मोतबर  इतने  नही होते/4/

लगा कर  आग  बस्ती में  हवन  करनी सियासत है
बिना  उन्माद   तो  इनके    सफल  धंधे  नही होते/5/

भरा  हो  पेट  तब  ही   सूझती  है  क्रांति  की  बातें
तड़पते   भूखे   लोगों  में    कभी   दंगे   नही  होते/6/

बने  जो  कागजों  पर  घर  बने  होते  हकीकत गर
हजारों  सर  अभी  फुटपाथ  पर   सोते  नही  होते/7/

कहीं  कपड़े  कहीं  गहने    कहीं  पे  कार आती है 
दवाई   माँ  की   लाने  को   मगर   पैसे  नही  होते/8/

सबक  हर  मोड़  पर  ही  जिंदगी  देती है अच्छे से
किसी  के  तौर लेकिन  कुछ समझने के  नही होते/9/

स्वयं की  कर  खुदाई   चाहता  है  गर  मिले  ईश्वर 
जियारत  से   इबादत  से   खुदा  अपने  नही  होते/10/

सहर से शाम तक रूठा हुआ है

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सहर  से  शाम  तक   रूठा  हुआ है
जरा सी  बात  थी  ऐसा  भी  क्या है/1/

शरारत    जिंदगी   में     है    जरुरी
मनाना   रुठना   तो    खेल   सा  है/2/

शिकायत  हर  घड़ी  अच्छी  नही है
खुशी गम  जिंदगी का  फलसफा है/3/

ये जो हर बात पर  लड़ते हो  हमसे 
बताओ    क्या     हमारा    राब्ता है/4/

पड़ी है  उम्र   लड़ने   के   लिए  तो
मुहब्बत  आज कर लो  क्या बुरा है/5/

नजर भर देख लें  इक बार  तुझको 
यही बस आखिरी  दिल की रजा है /6/

सिरा इक वक़्त का  खींचा जरा तो
परत  दर  हर  परत  खुलने लगा है/7/

गुजारा है जो हंस हंस कर के हमने
मुसलसल   खौफतर  मंजर  रहा है/8/

छिपा कर  दर्द  जो  रक्खा सभी से 
हरा  हर  जख्म  फिर से  हो  रहा है/9/

छलकने की वजह तो दो कोई अब
समंदर   आंख  में   ठहरा   हुआ है/10/

गुजरती  जाती  है  ये  उम्र  हर पल
बस इक लम्हा यहाँ  अटका पड़ा है/11/

अब कहाँ आन बान है प्यारे

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अब  कहाँ    आन बान     है  प्यारे
जिस्म   ढलती    दुकान   है   प्यारे/1/

अब   सफेदी   सी  आ  गई  सर पे 
उम्र  की    ये     ढलान   है    प्यारे /2/

एक खुशहाल घर था जो कल तक
अब  फकत   वो   मकान  है प्यारे/3/

हो  के   तस्कीन        भाई भाई में 
मां  की  आफत  में  जान  है प्यारे/4/

घर खुदा का है  जब ये सारा जहाँ 
फिर  क्यूँ  दहशत में जान है प्यारे/5/

मौज मस्ती में  दिन गुजार अपना
जब कि  रब   मेहरबान  है   प्यारे/6/

जिसको   शीरी   जबान  कहते हैं 
अनसुनी    दास्तान      है    प्यारे/7/

दिल  के  भीतर  गुबार  है  सबके
सामने   सब    महान   है    प्यारे/8/

आदमी बस जरा सा खरा चाहिए

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आदमी  बस  जरा सा  खरा चाहिए
जिंदगी  में  भला  और क्या चाहिए/1/

जो  भला है  न होगा कभी मतलबी
अहमियत ही उसे  बस जरा चाहिए/2/

ख्वाहिशें  हैं बहुत मुख्तसर सी मेरी
साथ मुझको सदा  बस तेरा चाहिए/3/

जिंदगी  यूँ  तो  है  खूबसूरत  बहुत
लुत्फ़ खुल के उठाना  सदा चाहिए/4/

बांध सकता  नही  रोशनी को कोई
हौसलों को  खुलापन  जरा चाहिए/5/

जिंदगी सी  कभी  तो  लगे जिंदगी
अजनबी  सी  नही भूमिका चाहिए/6/

मुस्कुराते  गुजर  जाए सुख चैन से
जिंदगी में  भला  और क्या चाहिए/7/

कायदे  जंगलों  के  लिए  जो  बने
लंगुरों  से  भी कुछ पूछना  चाहिये/8/

थोपिए मत भलाई की कड़वी दवा
जह्र  हो  पर वो मीठा जरा चाहिए/9/

बिक रही  खूब बेचारगी हर कदम 
शातिरी  को  भी रोटी सदा चाहिए/10/

मुस्कुराहट के पीछे छिपा लूँ व्यथा
इस लिए  एक चेहरा  नया चाहिए /11/

रात के दर्द पर लिख रहा हूँ ग़ज़ल
चांद तारों  से  भी  मशवरा चाहिए /12/

बस एक ही बंदे से शिकायत भी बहुत थी

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बस  एक  ही   बंदे से   शिकायत  भी बहुत थी
जाहिर  न  किया  दिल में मुहब्बत भी बहुत थी/1/

थी वज्ह बहुत मरने के खातिर तो हर इक पल
जीने  के  लिए  तेरी  बस आदत  भी  बहुत थी/2/

आने  जो  लगी  याद  तो भर आई  फिर आंखे
यादों  की  निगाहों से  तो  निस्बत भी बहुत थी/3/

रब  तूने   ये  किसके  लिए   जन्नत   है  बनाई
दुनिया में तो जालिमों की दहशत भी बहुत थी/4/

हर वक़्त  शिकायत  करें   अच्छा  नही लगता
रब  तेरे  लिए  दिल  में  यूँ  चाहत भी बहुत थी/5/

गलती  से  नही  सीखना  भी   है  बड़ी  गलती
इतना भी समझ लेने की  फितरत भी बहुत थी/6/

आंखों  में   धरी  है   मेरे   बस    एक    तमन्ना
हो  जाती मुकम्मल तो ये किस्मत भी बहुत थी/7/

खुशियों  के  बनेंगे  हमी  हकदार  किसी  दिन
संग अपने दुआओं की हिफाज़त भी बहुत थी/8/

अरसा  हुआ  है  खुल  के  नही  मुस्कुराए हम
हाथों  की  लकीरों में  अज़ीयत  भी  बहुत थी /9/

रुक  तो   नही   सकता है   अंधेरा  ये  हमेशा
उम्मीद  यही  वक़्त  की  ताकत  भी बहुत थी/10/

नफरत  से  नही  प्यार  से  जीतेंगे  जहां  हम
इस सोच में सबके लिए  उल्फत भी बहुत थी/11/

मौन क्यूँ सियासत है भूख के सवालों पर

212 1222 212 1222 
मौन  क्यूँ   सियासत है    भूख के   सवालों पर
लग गयी नजर किसकी मुफलिसी निवालों पर!/1/

आसमाँ  झुका  आखिर  जिद्दियों की शिद्दत से 
जोर  का   तमाचा है     तुगलकों के  गालों पर/2/

क्या खबर लगे तुमको  कुछ सवाल  आंखों के
ध्यान  कब  दिया  तुमने  बेबसी  के  नालों पर/3/

हर तरफ़   शिकारी ने   जाल है  बिछा  रक्खा 
अब  नजर  नही  आते   पंछी  कोई  डालों पर/4/

वक़्त  का   तकाजा  है   खेल  है  नजरिये का
चोर है  जमानत  पर   कैद   शिव शिवालों पर/5/

प्रापर्टी  समझ  बैठे   हम  तो  अपने  ईश्वर को
प्रश्न  अब   लगे  उठने   मंदिरों  के   तालों पर/6/

क्या  भला  बताएंँ  जो  हाल  है  शराफत का
चुप्पियाँ   धरी  सबने    चल  रहे   बवालों पर/7/

है   कहाँ   अंधेरा    ये   बात   अब   पुरानी है 
क्यूँ  अंधेरा  है  अब तक  प्रश्न है  उजालों पर/8/

रोज  रोज   की    हमसे    बंदगी   नही  होती
कीजिए  प्रभु  रहमत   कुछ  जहान वालों पर/9/

अचंभा है बहुत पहली नजर में प्यार हो जाना

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अचंभा है  बहुत   पहली  नजर  में  प्यार  हो  जाना
नही  आसां  किसी  के  साथ  आंखें  चार  हो जाना/1/

दिलों  का   मामला है  ये     नही  कोई    हँसी ठठ्ठा
बिना समझे बहुत मुश्किल  किसी का यार हो जाना/2/

शिकम की आग में जिसने  तपाया जिस्म है  अपना
न  मुमकिन  है  कहीं  उन हौसलों का हार हो जाना/3/

अदब  तहज़ीब  की   तालीम  भी   बेहद  जरूरी है
किताबें  चार   पढ़ना  ही  नही   संस्कार  हो  जाना/4/

तसल्ली  से भरे  कुछ लफ्ज़  मीठे ही  सुनाकर तुम
किसी की  मुस्कुराहट  का  कभी  आधार  हो जाना/5/

जरूरत के मुताबिक फाड़ सबने रख लिया मुझको
तुम्हें  मालूम  ही  क्या है  मियां  अखबार  हो जाना/6/

मिटा  पहचान  खुद की  बस फरेबों में  ही जीना है 
सहल  इतना  नही  दोहरा  कोई  किरदार हो जाना/7/

कभी  आओ  शरीफों से  तुम्हें  मिलवाएं  ऐ वाइज
तुम्हें  भी  हो खबर क्या है कि हद से पार हो जाना/8/

भरा  हो  पेट  तब  ही  सूझती  है  क्रांति  की  बातें
न  भूखों  का  कभी  देखा  कहीं यलगार हो जाना/9/

किया  है  वक़्त से  पहले  बड़ा हालात ने जिनको
तमन्ना  है  वही  बचपन  उन्हें  इक बार  हो  जाना/10/

फिर से तेरी बेरूखी महसूस की

2122 2122 212 
फिर से   तेरी    बेरूखी    महसूस की
हमने  उल्फत  में   कमी   महसूस की/1/

शोर  था   यूँ  तो  बहुत    बाहर मगर
दिल के  भीतर  खामुशी  महसूस की/2/

अब तलक उसको  भुला ना पाए हम
उसकी  खुश्बू  हर घड़ी   महसूस की/3/

मुस्कुराने   फिर   लगा  हूँ    आदतन
यूँ  खुशी  कुछ  भी नही  महसूस की/4/

जख्म  भरने  में   जरा   आया  तभी
दर्द  की  फिर   वापसी   महसूस की/5/

आदमी   जब  से   सयाना   हो गया
खत्म सी   दरिया दिली  महसूस की/6/

बोल कर   मीठा  जरा   हमने  सदा 
खत्म  हर    नाराजगी   महसूस की/7/

जिंदगी  से   उम्र भर   अनबन  रही
दूर  खुद से  हर खुशी   महसूस की/8/

आंख मिचने से नही छिपता है सच
इक चुभन  सी रोज़ ही महसूस की/9/

उलझनों  की  भीड़  में  है  लापता
हर तमन्ना  जीस्त  की  महसूस की/10/

याद आएगी कभी जब बात आखिरी हमारी

221 2122 221 2122 
याद आएगी  कभी जब  बात आखिरी हमारी
तब   देखना   खलेगी   तुमको   कमी  हमारी /1/

दो  चार   दिन  यहाँ  पर   मेहमान  जिंदगी है
याद आएगी   तुम्हें  कल   हर  सादगी हमारी/2/

पत्थर   भी   तैर  जाते  हैं  जब कृपा बरसती
विश्वास   पर    टिकी  है    बस  बंदगी हमारी/3/

आंसू   उबालती  है    खाली   पतीले  पर माँ 
यूँ   ढांपती    रही  है     वो    बेबसी   हमारी/4/

देखा है  हर  कदम  पर  ही  हादसा  नया सा
रक्खी है  आंच पर   ही    ये  जिंदगी  हमारी/5/

कुछ  फिक्र मंद  हरदम  रहता  हूँ इसलिए मैं
जाहिर  कभी  न  बच्चों  पर  हो कमी हमारी/6/

खुशियाँ लुटा सभी में दिल को खुशी मिलेगी
नफरत  मिटा  जिगर से सुन तो कभी हमारी/7/

बस  इंतजार   ही  तो   आया  हमारे हक में
तकदीर   दिल्लगी  बस  करती  रही  हमारी/8/

चेहरे  पे   यूँ   उदासी  अच्छी  नही  लगे पर
जाने  कहाँ   हुई  गुम  है  अब  हँसी  हमारी/9/

मत जिक्र भी करो तुम खुलकर यूँ बेबसी का 
उपहास   ही   मिलेगा     मानो  कही हमारी/10/

दौर इक ऐसा भी गुजरा है गुजरे सालों में

2122 1122 1212 22 
दौर  इक  ऐसा  भी  गुजरा है गुजरे सालों में
गिनतियाँ  होती  थी  औकात भी निवालों में/1/

पेट  के  वास्ते  टुकड़े   जिगर  के  बिकते थे
जिंदा रहने की हर इक शय थी बंद तालों में/2/

वक़्त  गुजरा  न  जियादा है याद हो  शायद
आग  भड़की  थी  कभी  बेहिसाब  दालों में/3/

आपके  घर  में   तबाही   मचा  वो  जाते थे
मांगते   आप   मदद  थे   जहान    वालों में /4/

हादसे  रोकना   अब  बस  में   ना   हमारे है
जिम्मेदारों  के      बयानात   थे    बवालों में/5/

गोभी   गमलों  में  हुनर मंद  कुछ  उगाते थे 
शक्लें  पहचानी   न  जाती  रही  उजालों में/6/

कोठियों पर चढ़ी जाती थी कोठियाँ हर दिन
मौज़  करती थी  गरीबी  फकत   खयालों में/7/

भूलने  की  रही  फितरत  है  तेरी सदियों से
भूल  जाता  है    अंधेरा     जरा  उजालों मे/8/

गलतियाँ  होगीं  यकीनन कहीं पे लाजिम है
पर न बदलाव दिखा क्या तुम्हें कुछ हालों में/9/

कुछ नया अब नही जिंदगी के लिए

212 212 212 212 
कुछ  नया  अब नही  जिंदगी के लिए 
जब मिली बस मिली दो घड़ी के लिए /1/

कर  रहे हैं  मलामत   वही  खौफ़ का
जो  रहे  नामची   खौफ़  ही  के  लिये/2/

थक  गयी  भूख से लड़ते नन्ही कली
सोने  दो   चैन  से   दो घड़ी  के लिए/3/

बन रहा जो खुदा था वो पत्थर कभी
वक़्त रहता न इक सा किसी के लिए/4/

चाहिए   एक  किरदार  हो  इस तरह 
कर दे  मजबूर  सबको हँसी के लिए/5/

आज खेमों में  दिखने लगी है कलम
कशमकश है  बहुत  लेखनी  के लिए/6/

है ये जाहिर  अलग हूँ  मैं तुझसे मगर
कर  तू  साबित  जुदाई  घड़ी के लिए/7/

शोर  करती  हैं   तन्हाईयाँ  भी  बहुत
हमसफ़र  चाहिए  इक  सभी के लिए/8/

ना  लगाया  कभी  ना  मिटाया  कभी
एक  नंबर   रखा है   खुशी   के  लिए/9/

है  सियासत  के  खातिर जरूरी बहुत
मुल्क  जलता  रहे  रोज़  ही  के  लिए/10/

जी  भरा  और  खाली  लगे मन अगर
खुद से लग खुद गले दो घड़ी के लिए/11/

खा  गया  हर  कदम  पर भरोसा मुझे
अब बचा मैं न कुछ भी किसी के लिए/12/

वक़्त के साथ सब कुछ बदल जाएगा

212 212 212 212 
वक़्त  के साथ  सब कुछ  बदल  जाएगा
शाम तक  तपता  सूरज भी ढल  जाएगा/1/

आएगी  फिर   नयी  सुब्ह    तुम  देखना
रात  ढल  जाएगी  दिन  निकल  जाएगा/2/

इक  जगह  वक़्त  रूकता  नही है कभी
देख  लेना   ये  दिन  भी  बदल  जाएगा/3/

रोशनी  के  लिए   इक  दिया   है   बहुत
चकचकाहट  से   मंजर   मचल  जाएगा/4/

रो  के  हल्का  हुआ   मन  यकीनन  तेरा
अब  जरा  मुस्कुरा  दिल  बहल  जाएगा/5/

याद  रखने  की  कुछ  भी  जरुरत  नही
सच  अगर  है  कोई  बात  चल  जाएगा/6/

उनके  हिस्से  ही   आएगा  सौभाग्य भी
फर्ज़ की  राह  पर  जो  निकल  जाएगा/7/

जो  न  लेगा  सबक  गुजरे कल से कोई
राह  में  चलते  चलते   फिसल  जाएगा/8/

साफ रख  सोच अपनी  तू  नीयत बदल
साथ   तेरे    तेरा    कर्म फल    जाएगा/9/

जंगलों  को    जरूरत    नही    आदमी
बाग   माली  बिना  पर   दहल  जाएगा/10/

सुन  तरक्की   सभी   मुस्कुरा   देंगे बस
बाप ही  बस  ये सुनकर  उछल जाएगा/11/

कितना मुश्किल है गढ़ना स्वयं ही स्वयं
गढ़ लो  तस्वीर   मालूम   चल  जाएगा/12/

मुकद्दर में कुछ तो यकीनन कमी है

122 122 122 122 
मुकद्दर  में  कुछ  तो    यकीनन   कमी है
मिली     दर ब दर  की    हमे   जिंदगी है/1/

तमन्नाएं     हर  दिन      हुई  है    पशेमां 
जरूरत  सदा   मुँह  को  खोले   खड़ी है/2/

कभी  चाहिए  कुछ  कभी  चाहिए  कुछ 
जरूरत   की  जैसे   झड़ी   सी   लगी है/3/

बड़ी   कशमकश    खूब    जद्दोजहद है
कहा  किसने    आसान  कब  जिंदगी है/4/
 
तमाशा    बना   खूब      पहले  तो  मेरा
बहुत  बाद  हुई      मेरे  घर     रोशनी है/5/

इजाजत  की  क्या है  जरूरत कभी भी
सियासत   लहू   की  तो   प्यासी  रही है/6/

अंधेरों  की  आदत  मुझे  पड़  गयी जब
जरा     रौशनी  सी      दिखाई    गयी है/7/

कमी  कुछ  खयालों  में  भी हो यकीनन 
जरा   गर्द  सी   जह्न  में   भी    दिखी है/8/

बड़ी  ही   मशक्कत  से  वो  याद  आए
कवायद  की  सब  वज्ह  जिनसे रही है /9/

भला  जिंदगी  से  शिकायत  करें  क्या 
सदा  से   रही  बन  के   ये  अजनबी है/10/

वही   एक  ही  बात   हर  पल   हमेशा 
मुसीबत   मुसीबत    मुसीबत    बड़ी है/11/

बहुत आंकलन कर लिया छोड़ दो अब
बुरा  सोचना   जी  लो  बस   जिंदगी है/12/

अभी सर पे इल्ज़ाम आने बहुत हैं

122 122 122 122 
अभी  सर  पे  इल्ज़ाम    आने बहुत हैं 
न   घबराइये     चोट     खाने  बहुत हैं /1/

निकल    यार   लेंगे   बहाने   बना कर
हमारे    हितैषी       सयाने      बहुत हैं/2/

नयी  बात   कोई    जरा    छेड़ अब तूं
गिले  शिकवे    तेरे    पुराने     बहुत हैं/3/

तुझे  हाले-दिल  हम  बताएंँ  भी  कैसे
ये  महफ़िल  में   तेरे   दिवाने  बहुत हैं/4/

नही  वस्ल  की  मिल  रही  वज्ह कोई
बिछड़ने  के   लेकिन   बहाने  बहुत हैं/5/

मिला  बरहना  जिस्म  फिर सर्दियों में
बने  कागजी     शामियाने     बहुत हैं/6/

हुई  नज़्र  बलवों  की इंसानियत फिर
इक अफवाह  हुडदंग  मचाने बहुत हैं /7/

ये  दैरो हरम  को    पता  भी  नही है
जली  उनकी खातिर  दुकानें बहुत हैं/8/

न कर  जल्दबाजी  किसी फैसले पर
कि किरदार अभी  आजमाने बहुत हैं /9/

जरूरी  नही  हर   नजरिया  सही हो
स्वघोषित  यहाँ    आस्तानें   बहुत हैं/10/

मुहब्बतों की सजा बेमिसाल दी उसने

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मुहब्बतों   की  सजा    बे मिसाल   दी  उसने 
उदासियों की कुछ आदत सी  डाल दी उसने/1/

तमाम  लानतों  की  माँ है भूख  जिसने कहा
शिकम के आग की अच्छी  मिसाल दी उसने/2/

तलाक  देती   जुबां  को    पता   नही  होता
किसी  की  जिंदगी  पल में  उबाल दी उसने/3/

जरा सी  रोशनी की  इल्तिजा थी रब से मेरी 
इनायतों  की   बड़ी  खेप  डाल   दी   उसने/4/

गुमाँ  न  पाने पे  खोने पे  कुछ  मलाल नही
ये तरबियत कुछ अलग सी कमाल दी उसने/5/

वो  एक  रात  जला  कह  दिया  चराग उसे 
हमारी  जद्दोजहद  हँस  के  टाल  दी  उसने/6/

भुला  न  दीये को  देना  सुब्ह    उजालों में 
जला के खुद को तजल्ली उछाल दी उसने/7/
 
लगे  हैं  आने   परिंदे   मुंडेर   पर   फिर से
यकीं  की  छत पे चुगौने जो डाल दी उसने/8/

पास से गुजरी है हर दफ़्अ किनारा करके

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पास  से  गुजरी  है  हर  दफ़्अ  किनारा  करके
जिंदगी    लौट  के    आयी   न   दुबारा   करके/1/

हम  तो   मायूस  ही   हर  बार   हो  के  लौटे हैं
जाने  वो   कौन  थे   जो   आए   नज़ारा करके/2/

हर  कदम  पर  ही  नया  एक  सबक मिलना है
जिंदगी     ने  है    बताया     ये   इशारा   करके/3/

दरमियाँ    फासलों  से    राब्ते   ही   हल्के  हुए
फायदा   क्या  है   भला   ऐसा   खसारा  करके/4/

ख्वाब   सिरहाने  ही   बैठे   हुए   हैं    आकर के
नींद   आंखों  से     नदारद   है     हरारा   करके/5/

रोक ले  आंसूओ  को  पलकों में  कूवत वो नही
हमने   देखा  है    बहुत   बार     असारा  करके/6/

घाव  गिनने  को  जो   बैठोगे  तो  थक जाओगे
इस कदर  चोट  मिली   दिल  को बिचारा करके/7/

घर से निकलो तो जरूरत को छिपा कर निकलो
लूट  लेती  है   ये  दुनिया    तो    सहारा   करके/8/

मुद्दतों    बाद      मुलाकात      हुई     ख्वाबों में
जिंदगी   लौट   गयी   फिर   से   मदारा   करके/9/

जिंदगी  तुझसे   शिकायत  है   हजारों   लेकिन 
रूठता   कौन  है     इस   तर्ह     इजारा  करके/10/

खसारा - नुकसान 
हरारा - धोखा
असारा - कैद
मदारा - समझौता 
इजारा - एकाधिकार

हाले-दिल सबको सुनाने से फजीहत होगी

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हाले-दिल   सबको   सुनाने  से  फजीहत होगी
मौन  रहने  से  ही   औकात  में  लज्जत  होगी/1/

ऐसी  बस्ती  कि   अंधेरा  ही  अंधेरा   हो  जहां
रोशनी   देने  में   सूरज   की    मुसीबत   होगी/2/

फिर  तेरे  बाद  कभी  कुछ  नही  खोया  हमने
तू  ही  बस  जिंदगी की आखिरी गफलत होगी/3/

मैं  बदल  जाऊँगा  इक  रोज़  कहे दुख हँस के
ऐसी  उम्मीद   निकल  आए  तो  रहमत  होगी/4/

मशवरे   देना  तो   आसां  है  बहुत   दुनिया में
साथ  मिल  जाए  अगर  वक़्त  पे  राहत होगी/5/

रूठ कर  जाने  लगी  आस  कोई  जो दिल से
आदमीयत  की    बड़ी   खूब   मलामत  होगी/6/

दूर  से  ही  भली  लगती  है  ये  आतिशबाजी
गर हो नजदीक तो सांसों में भी दिक्कत होगी/7/

जिस  भरोसे  से  बदन  सौप दिया  उसने हमें 
छू  लिया  हमने  तो  रूसवा ए मुहब्बत  होगी /8/

क्या  कभी  अपना ही  नंबर  घुमा के देखा है
खुद से  मिलने में  बहुत जोर मशक्कत होगी /9/

खुद को कुछ यूँ भी दिलासों से मनाया हमने
इक न इक  रोज़ तो  हमपे भी इनायत होगी/10/

शादी के बाद पहला ही आगमन हुआ था

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शादी  के बाद  पहला   ही  आगमन   हुआ था
बिटिया को  अपना  पीहर लगने लगा  नया था/1/

पैबंद   साड़ियों   की   अम्मा    छिपा   रही थी
खुशियाँ  बनावटी   थी  चेहरा    बता   रहा था/2/

नजरें  चुरा  के   पापा   जो    मुस्कुरा    रहे थे
सर पर  अभी भी  उनके  कर्जा  चढ़ा हुआ था/3/

जेवर   बिके  थे   माँ  के  मेरे   दहेज   खातिर
घर जो  बिका  पिता का  तो मेरा  घर बसा था/4/

बहना  लिपट के  रोई   भाई  लिपट  के  रोया
हर एक  अश्क  उनका  सौ  दर्द  कह रहा था/5/

पल्लू से माँ के अपने मुंह को छिपाके बिटिया
खुद  को  बहुत   संभाला  है  टूटना  मना था/6/

कल तक जो घर था मेरा सहसा हुआ पराया
मेहमान हूँ  वहां  अब  बचपन  जहाँ पला था /7/

दस्तूर  है   निभाया    दस्तार    रह्न   रखकर
टूटा  वो  बाप भी  जो पत्थर जिगर बड़ा था /8/

नजर मिलाते ही दिल में उतर वो जाते हैं

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नजर  मिलाते  ही   दिल  में   उतर  वो  जाते हैं
कमाल   खुब  ही   लम्हे  में   कर   वो   जाते है /1/

सजा  के  रक्खे  थे   अरमान   हमने     सीने में 
कि  बेखयाली  में   जर्जर   कतर   वो   जाते है/2/

गजब है  पहले  तो   मिलते  नही  कभी  हमसे 
जो  मिल  गये  तो  भी  कतरा गुजर वो जाते हैं/3/

महक  ही  उठती है  फूलों सी  उनकी सब राहे 
जो  नर्म  पैरो   चहल कदमी   कर  वो  जाते हैं/4/

वो  कत्ल  करते हैं  क्या खूब  शातिरी से मियाँ 
कि सादगी  से  ही  हँस कर  मुकर  वो  जाते हैं/5/

न लांघ पाए जो चौखट भी घर का अपने कभी 
गज़ब  है  आज   खयाले  सफर   वो   जाते हैं/6/

खबर  नही  है  जिन्हें   इश्क  विश्क  का प्यारे
कि  लड़खड़ाते   इधर  से   उधर   वो  जाते हैं/7/

तेरे आशना से जब भी मुलाकात होती है

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तेरे  आशना  से  जब  भी  मुलाकात होती है
तेरा  ही  जिक्र   तेरी  ही   बस  बात  होती है/1/

दिल जो सिसक उठे है सम्हलता नही है फिर 
जब  गैर  की    जुबां  से    बयानात  होती है/2/

दिन  तो  गुजर  ही  जाता  है आंसू बहा बहा
मुश्किल  बड़ी हो  जाती है  जब रात होती है/3/

पुर्जे  मिले  हैं  अपने  ही  खत  के  जवाब में
शायद  ये  इश्क   की  कोई  सौगात  होती है/4/

देखा  तुझे  तो  बन  गए  सब यार भी रकीब 
ये  हुश्न  के  कमाल  की   बस  बात  होती है/5/

सहमी रही लरजती रही हर खुशी मेरी

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सहमी  रही  लरजती  रही  हर  खुशी मेरी
लगती है  अजनबी  सी   मुझे जिंदगी मेरी/1/

कोशिश  जरा  भी  की जो कभी मुस्कुराने
हर दफ्अ  आयी   सामने  ही  बेबसी मेरी/2/

रहबर  समझ  रहे थे  जिसे  होशियार  था
दौलत  कमाया   बेच  के     बेचारगी  मेरी/3/

गर ये  कुबूलियत  की  घड़ी  है  मेरे खुदा 
लौटा दे कुछ घड़ी के लिए  बस हँसी मेरी/4/

मिट्टी में खेल कर हैं बहल जाते नौनिहाल 
अहसास है उन्हें भी तो अब हर कमी मेरी/5/

आंसू  यहाँ   निषेध  है  मुस्कान है  अवैध
कब से  है कैद   कोठियों में   रोशनी मेरी/6/

हर दिन   नया तमाशा   अदाएं   नई नई
भाती है खूब  जीस्त को  भी सादगी मेरी/7/

कांधो पे लाद करके  जरूरत की पोटली
चल पड़ती  रोज़ सुब्ह ही लाचारगी मेरी/8/

आते नही सुदामा के घर में कभी किशन
लाचार   इस कदर     रही है दोस्ती  मेरी/9/

नही है कुछ भी बुरा तो बता भला क्या है

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नही  है  कुछ  भी  बुरा तो बता भला क्या है 
ये  जिंदगी  ने  सिवा   दर्द  के  दिया क्या है/1/

कहीं   ये   दूरियांँ    मजबूरियाँ    ये  तन्हाई 
कसर  कहीं  पे  भी  बाकी कोई रहा क्या है/2/

अधूरी  हसरतें  कुछ  ख्वाब  बे मुकम्मल से
ये  ही  है  हासिली ता उम्र की मिला क्या है/3/

उदासियाँ    बे इरादा  सी     जह्न में   ठहरी
किसी  उम्मीद से  रिश्ता  मेरा  बता  क्या है/4/

बहुत  संभाल के  खुद को मैं खर्च करता हूँ
कि  शाम  पूछे  है आइना अब बचा क्या है/5/

तसल्लियों के सिवा कुछ न दे सका मुझको 
मेरा  नसीब  भी  निकला  गरीब सा क्या है/6/

खुशी कब देर तक किस शख्स के हिस्से में रहती है

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खुशी  कब  देर तक  किस शख्स के हिस्से में रहती है 
लरजती  सी    हँसी   मजबूर  के   चेहरे   में   रहती है/1/

जमाने  की  बदलती  इन  हवाओं  से  लगे  अब  डर  
गरीबों   घर  की   बेटी   आज  भी   परदे में  रहती है/2/

बने   हालात    कुछ   ऐसे   कि   ठंडे  पड़  गये चुल्हे 
बिलखते  देख  बच्चे   माँ  भी  बस  गुस्से  में रहती है/3/

बहुत है  भीड़ अपनो की  मगर  फिर भी है तन्हा हम
हमारी     नातेदारी     मतलबी      मेले   में   रहती है/4/

वफाएं   बिक  रही   बाजार  में   बेमोल   ही  अब तो 
उसूलें    बदहवासी     दर ब दर    रस्ते में     रहती है/5/

बिखरते   जर्रा  जर्रा   आशियाँ   ख्वाबों  के  सारे ही
अधुरी   ख्वाहिशें  सारी  ही  अब  टुकड़े  में  रहती है/6/

कभी  से   खत्म  है  ये   चाहतो  के   दौर   अब सारे
ये उल्फत आशिकी भी अब तो बस पचड़े में रहती है/7/

खड़ी है  झूठ  की  खातिर  तो  सारी दुनिया ही देखो 
शराफत   की  ही  हस्ती  खार  में  सहरे  में  रहती है/8/

दिन भी कब कहिये दिन जैसा लगता है

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दिन भी कब कहिये दिन जैसा लगता है
इसमें भी  किस्मत का  धोखा  लगता है/1/

नाम  नही   लेती  है   रात   गुजरने  का
भूल  गया   सूरज  भी   रस्ता  लगता है/2/

निश्चित  आंखें   बरसी  होंगी   रात भर
माँ  का   पल्लू   भीगा भीगा   लगता है/3/

यूँ  तो  तुमसे  बात  बहुत सी  कहनी है
कभी-कभी चुप रहना  अच्छा लगता है/4/

उम्मीदों    से    ही    उम्मीदें    रहतीं हैं 
उम्मीदों से  फिर  क्यूँ झटका लगता है/5/

दिखने को  ही  दिखती है सेहत अच्छी 
भीतर से  कमजोर  शिकस्ता लगता है /6/

मरता है  ना  जीता  है  मध्यम  तबका 
सांसे  जब   लेते  हैं   डर सा लगता है/7/

सूरज  के   पीछे  शायद  अंधियारा हो 
सूरज  बस  आगे  से उजला  लगता है/8/

मृगतृष्णा   के   पीछे   भागे  फिरता है
हर  बंदा  ही  पगलाया   सा  लगता है/9/

सारे  रावण  घर के  भीतर  से निकले
घर घर  ही  रावण  का  डेरा लगता है/10/

बस तमगों से पेट  नही  भरता साहब
जिंदा  रहने को तो निवाला  लगता है/11/

चांद को इत्तिला दीजिए

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चांद  को   इत्तिला  दीजिए
मुंतजिर  हैं   बता   दीजिए/1/

चांद  करता है  बदमाशियाँ
चांद को कुछ सजा दीजिए/2/

छत पे  मंडराता है रात भर
रख लूं पहलू में ला दीजिए/3/

या करो  यूँ  उसे  बांध  कर
बाम पर ही   टिका  दीजिए/4/

चांद  शातिर बहुत है  मियां
फांस  तगड़ी  जरा  दीजिए/5/

गिर न जाए कहीं सर पे ही
गांठ  अच्छी  लगा  दीजिए/6/

बदगुमानी  में है  चांद कुछ
सामने    आईना    दीजिए/7/

मेरे महबूब की इक झलक
चांद को बस दिखा दीजिए /8/

तमन्ना आरजू उम्मीद हसरत ही नही होती

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तमन्ना   आरजू   उम्मीद   हसरत   ही  नही होती
नही कुछ  रंज  रहता है  शिकायत  ही  नही होती/1/

हमे अब जिंदगी से  कुछ नही होता गिला शिकवा 
कभी  नाराज  होने  की   तबीयत  ही  नही  होती/2/

मिली है ठोकरें इतनी कि भूले शौक ख्वाहिश सब
हमे अब  जिंदगी से  कुछ भी चाहत ही नही होती/3/

नया है  दौर   आभासी  हुई  है   सारी  ही  दुनिया 
है  रस्मन  दोस्ती अब  बस  मुहब्बत ही नही होती/4/

नही  अब  रूठते हैं  की  मनाएगा  हमें फिर कौन
हमें  नाराज  होने  की   इजाजत  ही   नही  होती /5/

भला है या  बुरा है  फर्क  कुछ  पड़ता नही हमको
किसी से भी हमे अब कुछ शिकायत ही नही होती/6/

चले आए हैं  अब हम  उम्र के उस  मरहले पर की
कहीं कुछ  कहने सुनने की इजाजत ही नही होती/7/

चली  फिरकापरस्ती खूब  अब की फिर चुनावों में
बिना  उन्माद  भड़काए   सियासत  ही  नही होती/8/

बना है आज जो दुश्मन  वही कल दोस्त था गहरा 
मुहब्बत  गर नही  हो  तो  अदावत  ही  नही होती/9/

मनाता  हूँ  मै  मातम  रोज  उम्मीदों  के  मरने का
हमें  उम्मीद  करने  की   इजाजत  ही  नही  होती/10/

इक उम्र के बाद हाल पूछा नही है जाता

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इक उम्र  के  बाद  हाल  पूछा  नही  है  जाता
कबाड़  से  कुछ  सवाल  पूछा  नही है  जाता/1/

उधड़  ही  जाती है  हो पुरानी  परत  कोई भी
दिवार  से  अब  मलाल  पूछा  नही  है  जाता/2/

गुजर रही  मखमली लिहाफ़ो में रात जिनकी
कभी कुछ उनसे फिल्हाल पूछा नही है जाता/3/

कदम कदम  पे  कयामतों  की  ही  बारिशें हैं
नही  किसी  की  मजाल  पूछा  नही है जाता/4/

उम्मीद  है   आरज़ू   तमन्ना   सभी   दिलों में 
जरूरतें  हैं   कमाल   पूछा   नही   है  जाता/5/

शिकवा गिला न कोई तमाशा किये बगैर

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शिकवा  गिला न कोई    तमाशा   किये बगैर
तुझको  जिया  है  जिंदगी  रूसवा किये बगैर/1/

फिर भी  रही  न  जाने  सदा क्यूँ खफ़ा खफ़ा
हर बार  ही   मिली  है   भरोसा   किये   बगैर/2/

मुमकिन  नही  निबाह भी  इक उम्र बाद अब
रिश्तों के बीच  जिस्म का  हिस्सा  किए बगैर/3/

तुझसे   तेरे  शहर  में   मुलाकात  कर  लिया
वो  भी  तुम्हारे  नाम  का   चर्चा  किए  बगैर/4/

लिखने  से पहले आंख  से आंसू छलक पड़े
लिखना था खुश हूँ साथ  तुम्हारा किये बगैर/5/

सुरज का  क्या  कभी  भी न इतवार होता है
हर दिन  चला ये  आता  है  नागा किये बगैर/6/

थोड़ा है  थोड़ा  और   सदा  चाहती  है  बस
चलती  न   जिंदगी  है   तमन्ना   किये  बग़ैर/7/

ख़ुशियों का वक़्त आएगा बस सब्र कर जरा 
ग़म भी  तो  मिल  गया था इरादा किये बग़ैर/8/

ऐसा नही कि अब मै उसे चाहता नही

221 2121 1221 212 
ऐसा   नही  कि    अब  मैं   उसे    चाहता  नही
बस   देखने   की    हद  से   कभी  देखता नही/1/

अब  भी  खयाल  ख्वाब  में उसका ही दख्ल है
पर   आस   उसको   पाने  की   मैं पालता नही/2/

फिर   नोच  के   मसल के   कली  फेंक दी गई
ऐसा   मगर    ये  आज   नया   तो  हुआ  नही/3/
 
ढांढस   कोई    बंधाओ   कोई  हौसला  तो दो
दहशत   में    बेटियां  हैं     दरिंदा    मरा  नही/4/
 
उम्मीद  का  दिया  भी  फकत  फड़फड़ा रहा
चारो  तरफ    हवा  है  मगर    वो  बुझा  नही/5/

वो    कत्ल    कर  रहे  हैं  निगाहों  से  बारहा
मुंसिफ    सबूत    ढूंढ   रहा   है   मिला  नही/6/

अब   क्या  बताएंँ   हाल  दिले  बे करार  का
जाहिर है सब ही आप से कुछ भी छिपा नही/7/

हसरत थी कल के  उनसे मुलाकात हो कभी
अब हैं  हमारे  दिल में  तो  हमको  पता नहीं/8/

कब समय बदले दिखे मुख पर हँसी कुछ पल हठेली

2122 2122 2122 2122 
कब समय बदले दिखे मुख पर हँसी कुछ पल हठेली
कब  ढलेगी   रात   सज धज  सुबह  आएगी  नवेली

और   कितनी     वेदनाओं  से     हमारा    सामना है
और  कब तक  यूँ  अभावों की  डगर को   साधना है
और  कितने   कष्ट  सह कर    नेह  सब में  बांटना है

और  कब तक  जिंदगी  यूँ  ही  रहे   बन कर  पहेली
कब  ढलेगी  रात    सज धज आएगी    सुबह नवेली

मन  व्यथाओं  में  घिरा रहता  सदा  उलझा हुआ सा
भागता   प्रतिबिंब  के  पीछे   पकड़ने  को   ठगा सा 
लग रहा है अब बहुत ही  अनमना सा कुछ थका सा

थक  चुकी है  कर  प्रतीक्षा  देह भी अविरल अकेली
कब  ढलेगी रात    सज धज आएगी    सुबह नवेली 

थी  हृदय में   कामनाएँ   तो     हमारे भी    जरा सी 
स्वप्न थे    उन्मुक्त  अंबर में     विचरने की   हवा सी
पड़  गयी  भारी     सुहाने  स्वप्न के  ऊपर    उदासी

नीर  बन कर  बस नयन से   भावना  बहती  सहेली
कब ढलेगी रात    सज धज आएगी    सुबह नवेली

देखे जो दूर से सभी अच्छा दिखाई दे

221 2121 1221 212 
देखे  जो   दूर से  सभी   अच्छा  दिखाई दे 
ढलती उमर में दिल भी ये बच्चा दिखाई दे/1/

जब    बोलते  हैं   लाग लपेटी   हुई  जुबाँ
दोहरा  चरित्र   चाल  ये  चेहरा  दिखाई दे /2/

नफरत के बीज बो  वो रहे इस कदर यहाँ 
हर एक  शख्स  आज अदू सा  दिखाई दे/3/

फिर  हो गया है  हादसे  पर  हादसा कोई 
फिर  देखिए  नया  कोई  चर्चा  दिखाई दे/4/

उल्फत के सारे लफ्ज़ मआनी  बदल गये 
दर दर पे  आज  इश्क  तमाशा दिखाई दे /5/

कट गई यूँ ही जिन्दगी अपनी

2122 1212 22
कट  गई  यूँ  ही जिन्दगी अपनी
बस  नजर  आयी बेबसी अपनी /1/

हम  तरसते  रहे  हंसी  के  लिए 
मुँह  छुपाये  रही   खुशी  अपनी /2/

जिनसे  उम्मीद थी वफाओ की
उसने  की  खूब  दुश्मनी अपनी/3/

वो      फरेबो  का    कारबारी है
मात  खाती  है  सादगी   अपनी/4/

वो तो उल्फत को खेल कहते है 
हम  जिसे  समझे बंदगी अपनी/5/

हाल  दिल  के  बयां है  चेहरे से
हमको  मालूम  है  कमी अपनी /6/

इक हंसी को था  जिंदगी  माना
सौप दी  उसको ही हंसी अपनी/7/

कहाँ हैं आजकल अखबार जिंदा

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कहां  है  आजकल   अखबार  जिंदा
जिधर  देखो   है  बस  बाजार  जिंदा/1/

खबर  मिलती  नही  अब  देखने को
बिके  हैं     रोज     इश्तेहार    जिंदा/2/

जिधर  देखो  उधर  नफरत खड़ी है
हो  कैसे   खत्म  ये   तकरार  जिंदा/3/

नही  है  जाविंदा  ये  जिस्म  लेकिन
कयामत  तक  मिले  किरदार जिंदा/4/

परिंदा  फड़फड़ा कर  रह गया बस
कफस  में  है  वो बस लाचार जिंदा/5/

कही जाती न दिल की बात दिल से
दिलों  में   रह  गया  है   रार  जिंदा/6/

शिकायत है  बहुत सबको यहाँ पर
फकत  अब  रह गए हकदार जिंदा/7/

मुहब्बत  के  सफर  में  जाने  कैसे
हुई   शामिल   खरासें   यार  जिंदा/8/

जो हंसते हर घड़ी दिखता बहुत है

1222 1222 122 
जो  हंसते  हर  घड़ी  दिखता बहुत है
परेशाँ    रहता   है     तन्हा    बहुत है /1/

मिला  करता  है  जो   जिंदादिली से
छिपा कर  अश्क  वो  रोया   बहुत है/2/

छलकने  की  कोई  तो वज्ह दो अब
समंदर   आंख  में    ठहरा    बहुत है/3/

नही   संतुष्ट       कोई      जिंदगी से
यहाँ  हर  मोड़  पर  झटका  बहुत है/4/

तमन्नाएँ    न    ले     पाती  हैं   सांसे 
जरुरत   का    यहाँ    पहरा  बहुत है/5/

नही   सोया  गया   मुझसे  घड़ी भर
मेरे   कांधे    रखा    जिम्मा  बहुत है/6/

थी  घर की  बात क्यूँ  बाजार आयी
मेरा   तकदीर   से   झगड़ा  बहुत है /7/

लगा   अखबार   बूढ़ा  जैसे घर का 
जरूरत   बाद   जो   बेजा  बहुत है/8/

लगा है  मुश्किलों  का  आना जाना 
कि रिश्ता उससे कुछ गहरा बहुत है/9/

नही  बदला  कहीं  कुछ  बाद  तेरे
बिछड़ कर तुझसे हैं जिंदा बहुत है /10/

खुद अपने को तलाशेंगे अब हर दिन

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खुद अपने को  तलाशेंगे अब हर दिन 
भुला कर दुनिया  देखेंगे अब हर दिन/1/

खयालो  ने    बगावत    कर  रखी है
शरारत इसको लिक्खेंगे अब हर दिन /2/

न हो  नाराज  यूँ  हर बात  पर  दिल 
तुझे  फुर्सत  में  सोचेंगे  अब हर दिन /3/

तमन्ना   आरजू    उम्मीद   ख्वाहिश 
यकीनन  मार  डालेंगे   अब हर दिन /4/

तुम्हारे  बिन   जो  गुजरी  जिंदगी है 
तसल्ली  से   सुनाएंगे   अब हर दिन /5/

बखूब वाकिफ़  गरीबी  से  है बच्चा
अंगूठा  मुँह में  डालेंगे अब हर दिन /6/

बिछौने  कम है  मुफलिस जानता है 
पलक पे मेहमां रक्खेंगे अब हर दिन/7/

जरा सी बात पर हमसे खफ़ा हो

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जरा  सी   बात  पर   हमसे  खफा हो 
चला  है  दिल   कहांँ   हमसे जुदा हो/1/

कोई     इस   तर्ह   से    बे आबरू हो 
तेरी  महफ़िल  से  शायद  ही उठा हो/2/

तेरी भी शख्सियत कुछ तो खुले अब
भले  कुछ  दाग   दामन  में  लगा  हो/3/

बिखर के  भी  वो  यकसा लग रहा है 
वो  मर  के  भी  न  लगता है  मरा हो/4/

खिली  है   धूप   चारो  ओर  बढ़िया 
क्यूँ ना ऐसे में सबका दिल खिला हो/5/

पिघल  रिश्ते   गये  होंगे  सभी  अब 
समय  की  आंच  से  शायद बचा हो/6/

यहीं  पर   ही    मिलेंगे    ढूंढ  लेना 
कि तुझमे कुछ निशां  मेरा मिला हो/7/

बाद मुद्दत जरा फिर खुशी आ गयी

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बाद  मुद्दत  जरा  फिर   खुशी  आ  गयी 
कुछ   अंधेरा   छटा    रोशनी   आ  गयी /1/

दौर  गुजरा   बड़ा   खौफ तर  है   अभी
फिर    मचलती   हुई   जिंदगी  आ गयी /2/

किसके  खातिर  ये  जन्नत  बनाई  खुदा
किस  गुनहगार   को   बंदगी   आ  गयी/3/

जब तलक  जुस्तजू  थी  मिली ही नही
देख  अचानक  खुशी को हँसी आ गयी/4/

माँ की सेवा का अवसर  मिला भाग्य से
मन   महकने  लगा   ताजगी  आ  गयी/5/

एक   गुजरा   नया    दूसरा   आ  गया
मुश्किलें   अनवरत   झूमती  आ  गयी/6/

दौर  कैसा  अलहदा  गज़ब  चल  रहा 
मुस्कुराहट  में  सबके  कमी  आ  गयी/7/

मैने  पापा  के  जूते   पहन  जब  लिए
सामने    हर  कमी    बेबसी  आ  गयी/8/

तर्जबे   फिर   नये    दे  गयी   जिंदगी
वक़्त पर साथ की फिर कमी आ गयी/9/

खुश्बू  लायी  हवा  मन  महकने  लगा
वो  खयालों  में  आए  खुशी  आ गयी/10/

दर्द  भी  है   दवा  भी  है  ये  जिन्दगी
सोचकर कुछ हँसी कुछ नमी आ गयी/11/

जिस्म जो झुलस रखा जरूरतों के ताब में

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जिस्म  जो  झुलस  रखा  जरूरतों  के  ताब में
चांद  और  सितारे   देखते  नही   वो  ख्वाब में/1/

सांस सांस  के  लिए   चले   है  जंग  हर समय
क्या   खबर  उन्हें   महक   कैसी  है  गुलाब में/2/

तजुर्बा  मिला  हमें  जो  जिंदगी  में अब तलक
हमने  वो  सबक  नही  पढ़ा  किसी  किताब में/3/

टालता  रहा   समय  का   हर  सवाल  आदमी
फिर  सवाल  आ  गया   सवाल  के  जवाब में/4/

फूंकते  हैं   मग्न  हो      बुराई  के   प्रतीक को 
खुद में  झांकने  की  अक्ल  है नही  जनाब में /5/

मुद्दतों से   जल  रहा   लंकेश   पर   मरा  नही 
फिर  निकल  पड़े  ख़बीस  राम  के  नकाब में/6/

इन  दिनों  बखूब  चल  रहा  नशा  है  धर्म का
ये  नशा   नही   किसी   अफीम  में   शराब में/7/

घर में  आग  तो  लगी है  घर  के ही  चराग से
वरना  हैसियत   कहाँ  है  पाक  में  कसाब में/8/

एक  से  दिखे  हैं  सारे  चेहरे  आजकल यहाँ 
फर्क़  कैसे  कीजियेगा  अच्छे  और खराब में /9/

सुख तलाशना भी दुख के वज्ह में गिना गया 
हम  विफल  रहे  सदा  नसीब  के  हिसाब में/10/

बस प्रभू श्री राम का ही अनुशरण मैं चाहता हूँ

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बस प्रभू  श्री राम   का  ही   अनुशरण मैं चाहता हूँ
चित्त  में  बैठे   दशानन  का   दहन   मैं   चाहता हूँ/1/

यूँ   हमारे  ही  शहर  में   है  बहुत  मंदिर शिवालय
हो  जहाँ   इंसानियत   ठहरी   भवन  मैं  चाहता हूँ/2/

पोंछ  दे  आकर  कभी  आंसू  सुदामा  के  कन्हैया
चाह  मन में   है  कभी   ऐसा   रुदन  मैं  चाहता हूँ/3/

लौट  ना   जाए  कभी   मायूस   होकर   बेबसी ही
आरज़ू   उम्मीद   पूर्ति  का   सदन   मैं   चाहता हूँ/4/

आपसी   रंजिश  न  हो   आदमी  से  आदमी  की
हर तरफ  सुख  चैन  हो  ऐसा  वतन  मैं चाहता हूँ/5/

बंद  कर दो   अब  फसादी बात   उन्मादी  कसीदे
अब  घरों  घर  देखना  हर पल अमन मैं चाहता हूँ/6/

अब  रहे  भूखा  न  कोई  अब  रहे  प्यासा न कोई
अब  न  रोता  ही  दिखे  उल्लास मन मैं चाहता हूँ/7/

मुश्किलें  कर ले  वहन  सारी  घड़ी भर में स्वयं ही
जिंदगी में  मित्र  की  सूरत   किशन  मैं  चाहता हूँ/8/

बस  मिले  ईमान  की रूखी मिले सूखी मिले कुछ 
हक किसी का छीन भोजन ना भजन मैं चाहता हूँ/9/

बस  प्रभू का  नाम  सुबहो शाम  मैं  भजता रहा हूँ
जिंदगी  यूँ  ही   गुजर  जाए   शयन  मैं  चाहता हूँ/10/

खुशी की आस में कर जिंदगी उधार चले

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खुशी की  आस में  कर  जिंदगी उधार चले
जरूरतों  के ही होकर  के  दिन गुजार चले/1/

निकल पड़े हैं  हर इक  सुब्ह ढुंढने खुद को
हर एक शाम   बदन   खूंटी  पर उतार चले/2/

तमन्ना  आरजू  उम्मीद   रख  के   पहलू में 
खयाल  ख्वाब की दुनिया सजा सँवार चले/2/

तसल्लियों में रही गुम  तमाम खुशियाँ सदा
कदम कदम से  मिला गम भी बेशुमार चले/4/

भटक रही है कज़ा कब से जुस्तजू में मियां 
बदन से  रूह  भला कब तलक फरार चले/5/

ये फूल खुशबू ये गुलशन ये रंग रौनक सब
चलो  जो  साथ मेरे तुम तो फिर बहार चले/6/

हवाएँ  शाम  से   दहलीज  पर  ही  बैठीं हैं
जले  चराग  तो  फिर  झूम  के  बयार चले/7/

बुझे बुझे से चरागों को फिर जलाओ तो

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बुझे बुझे  से   चरागों  को    फिर   जलाओ  तो
बहुत   अंधेरा     यहाँ   है     उजाले   लाओ तो/1/

तरस   गये  हैं    यहाँ    धूप   देखने   के   लिए
अंधेरी   बस्तियों  में     शम्स   इक   उगाओ तो/2/

तड़प को भूख को अहसास  कर सको तो कहो
तसल्लियों  के    मुहल्ले    गुजर  के  आओ तो/3/

कभी  तो   टूटे   हुए   ख्वाब  के   चुभें   किरचें
उदासियों   के    सहारे     कभी     बिताओ तो/4/

लगन को  कांटो  की  परवाह  कुछ  नही होती
किसी के साथ  भी  शिद्दत से तुम निभाओ तो/5/

ठनी  रही   है  जरुरत  की  ख्वाहिशों  से सदा
नसीब   राह   सहल   अब   कोई  बनाओ  तो/6/
 
तरस   गयी  है    निगाहें     भी   ताकते  रस्ता
कभी तुम अपनी जरा सी  झलक दिखाओ तो/7/

फकत  किसी  भी  बहाने से  दो घड़ी को सही 
उलाहने  ही   तुम   आकर   कभी  सुनाओ तो/8/

हर दिन नया तमाशा मालिक दिखा रहा है

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हर  दिन   नया  तमाशा   मालिक  दिखा रहा है
पल  में    हंसा  रहा  है    पल  में   रुला रहा  है/1/

मर्जी  उसी   की   प्यारे      जैसी   गुजार  दे वो
उसके  ही  हाथ  जीवन     वो  ही  चला रहा है/2/

खुदगर्जियाँ   हैं  मेरी    कुछ   अर्जियाँ  है  मेरी
सब  अर्जियाँ  वो   मेरी  इक इक  निभा रहा है/3/

दर  पर  जो  आया   तेरे  हर  कोई  था सवाली
सबने  ही   मांगा  तुझसे   बस    मांगता रहा है/4/

किसने  मिजाज  पूछा   कब  तेरा  हाल  जाना
मतलब  से  हर  कोई  बस  तुझे  पूजता रहा है/5/

तूने  है मान  रक्खा  सबका  ही  ध्यान  रक्खा 
जिसकी  थी  चाह  जैसी   रहमत  लुटा रहा है/6/

संतुष्टियाँ       नही  है     जद्दोजहद     बड़ी है
जितना मिला जिसे उतनी और लालसा रहा है/7/

मांगा है श्याम से सब बस श्याम को भुला कर 
कमबख्त  दिल   सदा से  गुस्ताख  सा  रहा है/8/

है  लफ्ज़  यूँ  हजारों  बढ़ कर  न  मां से कोई
दुनिया  में   माँ  से   प्यारा   ना  दूसरा  रहा है/9/

श्रद्धा  के  पुष्प  तुझ पर  करता हूँ मैं समर्पित
बस  भावना  है  मेरी    बाकी तो सब  तेरा  है/10/

अब तक सुलग रहा है उठता धुआँ घना सा

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अब  तक  सुलग  रहा है  उठता  धुआँ  घना सा
इक रिश्ता  जलते जलते  बस  रह गया जरा सा/1/

सींचे थे  कुछ  मुहब्बत  के बीज  घर के  आंगन 
बिन खाद  पानी  पौधा     दिखता  मरा मरा सा/2/

मय्यत निकल चुकी है  उल्फत की बरसों पहले
दिखता है अब तलक क्यूँ ये दिल  भरा भरा सा/3/

रिश्तों की  चाक  चादर      तुरपाई  कर रहा था 
उंगली  चुभी   सुई   तो   मैं  रह   गया  डरा सा/4/

हर  शख्स  को  वसीयत  में  ही मिली शराफत 
फिर  भी  हर  एक  बंदा  क्यूँ  है  ठगा ठगा सा/5/

निकले  थे  सुब्ह  घर से  कुछ  साथ थे तकाजे
लौटे  हैं  शाम  खाली   मन  है  थका थका सा/6/

बस  राख  ही  बची है  बाकी  तो  कुछ  नही है 
बस्ती  थी  कल  यहां पर  अब है सुना सुना सा/7/