212 212 212 212
आदमी बस जरा सा खरा चाहिए
जिंदगी में भला और क्या चाहिए/1/
जो भला है न होगा कभी मतलबी
अहमियत ही उसे बस जरा चाहिए/2/
ख्वाहिशें हैं बहुत मुख्तसर सी मेरी
साथ मुझको सदा बस तेरा चाहिए/3/
जिंदगी यूँ तो है खूबसूरत बहुत
लुत्फ़ खुल के उठाना सदा चाहिए/4/
बांध सकता नही रोशनी को कोई
हौसलों को खुलापन जरा चाहिए/5/
जिंदगी सी कभी तो लगे जिंदगी
अजनबी सी नही भूमिका चाहिए/6/
मुस्कुराते गुजर जाए सुख चैन से
जिंदगी में भला और क्या चाहिए/7/
कायदे जंगलों के लिए जो बने
लंगुरों से भी कुछ पूछना चाहिये/8/
थोपिए मत भलाई की कड़वी दवा
जह्र हो पर वो मीठा जरा चाहिए/9/
बिक रही खूब बेचारगी हर कदम
शातिरी को भी रोटी सदा चाहिए/10/
मुस्कुराहट के पीछे छिपा लूँ व्यथा
इस लिए एक चेहरा नया चाहिए /11/
रात के दर्द पर लिख रहा हूँ ग़ज़ल
चांद तारों से भी मशवरा चाहिए /12/
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