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बस एक ही बंदे से शिकायत भी बहुत थी
जाहिर न किया दिल में मुहब्बत भी बहुत थी/1/
थी वज्ह बहुत मरने के खातिर तो हर इक पल
जीने के लिए तेरी बस आदत भी बहुत थी/2/
आने जो लगी याद तो भर आई फिर आंखे
यादों की निगाहों से तो निस्बत भी बहुत थी/3/
रब तूने ये किसके लिए जन्नत है बनाई
दुनिया में तो जालिमों की दहशत भी बहुत थी/4/
हर वक़्त शिकायत करें अच्छा नही लगता
रब तेरे लिए दिल में यूँ चाहत भी बहुत थी/5/
गलती से नही सीखना भी है बड़ी गलती
इतना भी समझ लेने की फितरत भी बहुत थी/6/
आंखों में धरी है मेरे बस एक तमन्ना
हो जाती मुकम्मल तो ये किस्मत भी बहुत थी/7/
खुशियों के बनेंगे हमी हकदार किसी दिन
संग अपने दुआओं की हिफाज़त भी बहुत थी/8/
अरसा हुआ है खुल के नही मुस्कुराए हम
हाथों की लकीरों में अज़ीयत भी बहुत थी /9/
रुक तो नही सकता है अंधेरा ये हमेशा
उम्मीद यही वक़्त की ताकत भी बहुत थी/10/
नफरत से नही प्यार से जीतेंगे जहां हम
इस सोच में सबके लिए उल्फत भी बहुत थी/11/
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