2122 2122 212
जीस्त अब ऐसे संभाली जाएगी
हर बला हंस कर के टाली जाएगी/1/
कश्मकश जद्दोजहद के दरमियाँ
राह जीने की निकाली जाएगी/2/
बोल कर मीठा जरा नाराजगी
बरसों की पल में मिटा ली जाएगी/3/
आंख के कोरो से बह निकली है जो
फिर से वो उम्मीद पाली जाएगी/4/
होंगे पूरे जो दबाएं सीने में
आस कोई अब न खाली जाएगी/5/
अब तलक बेजा उदासी में रहे
जिंदगी फिर से हँसा ली जाएगी/6/
हो कहीं कोई मुसलसल वाकिया
राह मिलकर के सुझा ली जाएगी/7/
हर मुसीबत से निपटने के लिए
कुछ नयी युक्ति उछाली जाएगी/8/
ख्वाब गर लगने लगे बोझिल से तो
ख्वाब की मय्यत निकाली जाएगी/9/
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