212 212 212 212
वक़्त के साथ सब कुछ बदल जाएगा
शाम तक तपता सूरज भी ढल जाएगा/1/
आएगी फिर नयी सुब्ह तुम देखना
रात ढल जाएगी दिन निकल जाएगा/2/
इक जगह वक़्त रूकता नही है कभी
देख लेना ये दिन भी बदल जाएगा/3/
रोशनी के लिए इक दिया है बहुत
चकचकाहट से मंजर मचल जाएगा/4/
रो के हल्का हुआ मन यकीनन तेरा
अब जरा मुस्कुरा दिल बहल जाएगा/5/
याद रखने की कुछ भी जरुरत नही
सच अगर है कोई बात चल जाएगा/6/
उनके हिस्से ही आएगा सौभाग्य भी
फर्ज़ की राह पर जो निकल जाएगा/7/
जो न लेगा सबक गुजरे कल से कोई
राह में चलते चलते फिसल जाएगा/8/
साफ रख सोच अपनी तू नीयत बदल
साथ तेरे तेरा कर्म फल जाएगा/9/
जंगलों को जरूरत नही आदमी
बाग माली बिना पर दहल जाएगा/10/
सुन तरक्की सभी मुस्कुरा देंगे बस
बाप ही बस ये सुनकर उछल जाएगा/11/
कितना मुश्किल है गढ़ना स्वयं ही स्वयं
गढ़ लो तस्वीर मालूम चल जाएगा/12/
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