Monday, 7 February 2022

कहीं गम कहीं पे सुकून है

11212 11212 
कहीं  गम  कहीं  पे  सुकून है... 
कहीं बारिशों   का    जुनून है... /1/

कहीं   भीगते   से  है   झोपडे... 
कहीं   मस्तियों   के  ही टून है... /2/

कहीं दरिया बहती है आंख से... 
कहीं     ख्वाब  में  एक मून है... /3/

यहां  मुर्दे  बसते है  बस  मियां... 
हुए  माफ   सारे   ही    खून है... /4/

जरा  लफ्ज़  अपने   तरासिये... 
यूँ  है   चुभते   ज्यूं    नखून है... /5/

इन अदालतों  में   न  न्याय है ... 
यहां  पर  चले      टेलिफून है... /6/

कहीं  चिथड़ो   में  है   जिंदगी ... 
कहीं   चिथड़ो     का  शुगून है... /7/

कहीं   नालियों   में   अनाज है... 
कहीं    भुखमरी  के   फुनून है... /8/

ये  तरक्कियों  का  जो  दौर है...
सभी  शख्स अपनी  ही धून है.../9/

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