11212 11212
कहीं गम कहीं पे सुकून है...
कहीं बारिशों का जुनून है... /1/
कहीं भीगते से है झोपडे...
कहीं मस्तियों के ही टून है... /2/
कहीं दरिया बहती है आंख से...
कहीं ख्वाब में एक मून है... /3/
यहां मुर्दे बसते है बस मियां...
हुए माफ सारे ही खून है... /4/
जरा लफ्ज़ अपने तरासिये...
यूँ है चुभते ज्यूं नखून है... /5/
इन अदालतों में न न्याय है ...
यहां पर चले टेलिफून है... /6/
कहीं चिथड़ो में है जिंदगी ...
कहीं चिथड़ो का शुगून है... /7/
कहीं नालियों में अनाज है...
कहीं भुखमरी के फुनून है... /8/
ये तरक्कियों का जो दौर है...
सभी शख्स अपनी ही धून है.../9/
No comments:
Post a Comment