212 1222 212 1222
मौन क्यूँ सियासत है भूख के सवालों पर
लग गयी नजर किसकी मुफलिसी निवालों पर!/1/
आसमाँ झुका आखिर जिद्दियों की शिद्दत से
जोर का तमाचा है तुगलकों के गालों पर/2/
क्या खबर लगे तुमको कुछ सवाल आंखों के
ध्यान कब दिया तुमने बेबसी के नालों पर/3/
हर तरफ़ शिकारी ने जाल है बिछा रक्खा
अब नजर नही आते पंछी कोई डालों पर/4/
वक़्त का तकाजा है खेल है नजरिये का
चोर है जमानत पर कैद शिव शिवालों पर/5/
प्रापर्टी समझ बैठे हम तो अपने ईश्वर को
प्रश्न अब लगे उठने मंदिरों के तालों पर/6/
क्या भला बताएंँ जो हाल है शराफत का
चुप्पियाँ धरी सबने चल रहे बवालों पर/7/
है कहाँ अंधेरा ये बात अब पुरानी है
क्यूँ अंधेरा है अब तक प्रश्न है उजालों पर/8/
रोज रोज की हमसे बंदगी नही होती
कीजिए प्रभु रहमत कुछ जहान वालों पर/9/
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