2122 2122 212
फिर से तेरी बेरूखी महसूस की
हमने उल्फत में कमी महसूस की/1/
शोर था यूँ तो बहुत बाहर मगर
दिल के भीतर खामुशी महसूस की/2/
अब तलक उसको भुला ना पाए हम
उसकी खुश्बू हर घड़ी महसूस की/3/
मुस्कुराने फिर लगा हूँ आदतन
यूँ खुशी कुछ भी नही महसूस की/4/
जख्म भरने में जरा आया तभी
दर्द की फिर वापसी महसूस की/5/
आदमी जब से सयाना हो गया
खत्म सी दरिया दिली महसूस की/6/
बोल कर मीठा जरा हमने सदा
खत्म हर नाराजगी महसूस की/7/
जिंदगी से उम्र भर अनबन रही
दूर खुद से हर खुशी महसूस की/8/
आंख मिचने से नही छिपता है सच
इक चुभन सी रोज़ ही महसूस की/9/
उलझनों की भीड़ में है लापता
हर तमन्ना जीस्त की महसूस की/10/
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