Monday, 7 February 2022

शिकवा गिला न कोई तमाशा किये बगैर

221 2121 1221 212
शिकवा  गिला न कोई    तमाशा   किये बगैर
तुझको  जिया  है  जिंदगी  रूसवा किये बगैर/1/

फिर भी  रही  न  जाने  सदा क्यूँ खफ़ा खफ़ा
हर बार  ही   मिली  है   भरोसा   किये   बगैर/2/

मुमकिन  नही  निबाह भी  इक उम्र बाद अब
रिश्तों के बीच  जिस्म का  हिस्सा  किए बगैर/3/

तुझसे   तेरे  शहर  में   मुलाकात  कर  लिया
वो  भी  तुम्हारे  नाम  का   चर्चा  किए  बगैर/4/

लिखने  से पहले आंख  से आंसू छलक पड़े
लिखना था खुश हूँ साथ  तुम्हारा किये बगैर/5/

सुरज का  क्या  कभी  भी न इतवार होता है
हर दिन  चला ये  आता  है  नागा किये बगैर/6/

थोड़ा है  थोड़ा  और   सदा  चाहती  है  बस
चलती  न   जिंदगी  है   तमन्ना   किये  बग़ैर/7/

ख़ुशियों का वक़्त आएगा बस सब्र कर जरा 
ग़म भी  तो  मिल  गया था इरादा किये बग़ैर/8/

No comments:

Post a Comment