221 2121 1221 212
शिकवा गिला न कोई तमाशा किये बगैर
तुझको जिया है जिंदगी रूसवा किये बगैर/1/
फिर भी रही न जाने सदा क्यूँ खफ़ा खफ़ा
हर बार ही मिली है भरोसा किये बगैर/2/
मुमकिन नही निबाह भी इक उम्र बाद अब
रिश्तों के बीच जिस्म का हिस्सा किए बगैर/3/
तुझसे तेरे शहर में मुलाकात कर लिया
वो भी तुम्हारे नाम का चर्चा किए बगैर/4/
लिखने से पहले आंख से आंसू छलक पड़े
लिखना था खुश हूँ साथ तुम्हारा किये बगैर/5/
सुरज का क्या कभी भी न इतवार होता है
हर दिन चला ये आता है नागा किये बगैर/6/
थोड़ा है थोड़ा और सदा चाहती है बस
चलती न जिंदगी है तमन्ना किये बग़ैर/7/
ख़ुशियों का वक़्त आएगा बस सब्र कर जरा
ग़म भी तो मिल गया था इरादा किये बग़ैर/8/
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