212 212 212 212
बाद मुद्दत जरा फिर खुशी आ गयी
कुछ अंधेरा छटा रोशनी आ गयी /1/
दौर गुजरा बड़ा खौफ तर है अभी
फिर मचलती हुई जिंदगी आ गयी /2/
किसके खातिर ये जन्नत बनाई खुदा
किस गुनहगार को बंदगी आ गयी/3/
जब तलक जुस्तजू थी मिली ही नही
देख अचानक खुशी को हँसी आ गयी/4/
माँ की सेवा का अवसर मिला भाग्य से
मन महकने लगा ताजगी आ गयी/5/
एक गुजरा नया दूसरा आ गया
मुश्किलें अनवरत झूमती आ गयी/6/
दौर कैसा अलहदा गज़ब चल रहा
मुस्कुराहट में सबके कमी आ गयी/7/
मैने पापा के जूते पहन जब लिए
सामने हर कमी बेबसी आ गयी/8/
तर्जबे फिर नये दे गयी जिंदगी
वक़्त पर साथ की फिर कमी आ गयी/9/
खुश्बू लायी हवा मन महकने लगा
वो खयालों में आए खुशी आ गयी/10/
दर्द भी है दवा भी है ये जिन्दगी
सोचकर कुछ हँसी कुछ नमी आ गयी/11/
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