1222 1222 1222 1222
तमन्ना आरजू उम्मीद हसरत ही नही होती
नही कुछ रंज रहता है शिकायत ही नही होती/1/
हमे अब जिंदगी से कुछ नही होता गिला शिकवा
कभी नाराज होने की तबीयत ही नही होती/2/
मिली है ठोकरें इतनी कि भूले शौक ख्वाहिश सब
हमे अब जिंदगी से कुछ भी चाहत ही नही होती/3/
नया है दौर आभासी हुई है सारी ही दुनिया
है रस्मन दोस्ती अब बस मुहब्बत ही नही होती/4/
नही अब रूठते हैं की मनाएगा हमें फिर कौन
हमें नाराज होने की इजाजत ही नही होती /5/
भला है या बुरा है फर्क कुछ पड़ता नही हमको
किसी से भी हमे अब कुछ शिकायत ही नही होती/6/
चले आए हैं अब हम उम्र के उस मरहले पर की
कहीं कुछ कहने सुनने की इजाजत ही नही होती/7/
चली फिरकापरस्ती खूब अब की फिर चुनावों में
बिना उन्माद भड़काए सियासत ही नही होती/8/
बना है आज जो दुश्मन वही कल दोस्त था गहरा
मुहब्बत गर नही हो तो अदावत ही नही होती/9/
मनाता हूँ मै मातम रोज उम्मीदों के मरने का
हमें उम्मीद करने की इजाजत ही नही होती/10/
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