1222 1222 1222 1222
खुशी कब देर तक किस शख्स के हिस्से में रहती है
लरजती सी हँसी मजबूर के चेहरे में रहती है/1/
जमाने की बदलती इन हवाओं से लगे अब डर
गरीबों घर की बेटी आज भी परदे में रहती है/2/
बने हालात कुछ ऐसे कि ठंडे पड़ गये चुल्हे
बिलखते देख बच्चे माँ भी बस गुस्से में रहती है/3/
बहुत है भीड़ अपनो की मगर फिर भी है तन्हा हम
हमारी नातेदारी मतलबी मेले में रहती है/4/
वफाएं बिक रही बाजार में बेमोल ही अब तो
उसूलें बदहवासी दर ब दर रस्ते में रहती है/5/
बिखरते जर्रा जर्रा आशियाँ ख्वाबों के सारे ही
अधुरी ख्वाहिशें सारी ही अब टुकड़े में रहती है/6/
कभी से खत्म है ये चाहतो के दौर अब सारे
ये उल्फत आशिकी भी अब तो बस पचड़े में रहती है/7/
खड़ी है झूठ की खातिर तो सारी दुनिया ही देखो
शराफत की ही हस्ती खार में सहरे में रहती है/8/
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