Monday, 7 February 2022

अब किसी के बस्ते में चकरियाँ नही मिलतीं

212 1222 212 1222 
अब  किसी  के  बस्ते में   चकरियाँ  नही  मिलतीं
बीच में   किताबों  के     तितलियाँ  नही  मिलतीं/1/

मग्न  है  मोबाईल पर  आजकल हर इक बचपन
अब  गली  मुहल्ले  में     टोलियाँ   नही  मिलतीं/2/

हर  तरफ़   उदासी  है   खौफ़ तर    दिखे  मंजर
आजकल   किसी  चेहरे   मस्तियाँ  नही  मिलतीं/3/

नींद  आ  ही  जाती  है  चाहे जिस मशक्कत पर
सर  पे  माँ  के  हाथों  की थपकियाँ नही मिलतीं/4/

हर  खुशी  हुई  हासिल    पैसों  की  बदौलत पर
दाम   कोई   भी देकर     लोरियाँ   नही  मिलतीं/5/

भूख  तो    मिटा   लेते     होटलों  में     ढाबों में
माँ के हाथों  की   लेकिन  रोटियांँ  नही  मिलतीं/6/

स्वार्थ  में  ही  बनते  हैं    सारे   रिश्ते  नाते अब
दिल में अब उतर दिल की  यारियाँ नही मिलतीं/7/

हर कदम  पे  देती है  इक  नया  सबक हर दिन
जिंदगी के  मकतब  में   डिग्रियांँ   नही  मिलतीं/8/

घर  बिका है बाबुल का  बालियाँ  बिकी माँ की
बेटियों  की   सस्ते  में   डोलियाँ   नही  मिलतीं/9/

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