212 1222 212 1222
अब किसी के बस्ते में चकरियाँ नही मिलतीं
बीच में किताबों के तितलियाँ नही मिलतीं/1/
मग्न है मोबाईल पर आजकल हर इक बचपन
अब गली मुहल्ले में टोलियाँ नही मिलतीं/2/
हर तरफ़ उदासी है खौफ़ तर दिखे मंजर
आजकल किसी चेहरे मस्तियाँ नही मिलतीं/3/
नींद आ ही जाती है चाहे जिस मशक्कत पर
सर पे माँ के हाथों की थपकियाँ नही मिलतीं/4/
हर खुशी हुई हासिल पैसों की बदौलत पर
दाम कोई भी देकर लोरियाँ नही मिलतीं/5/
भूख तो मिटा लेते होटलों में ढाबों में
माँ के हाथों की लेकिन रोटियांँ नही मिलतीं/6/
स्वार्थ में ही बनते हैं सारे रिश्ते नाते अब
दिल में अब उतर दिल की यारियाँ नही मिलतीं/7/
हर कदम पे देती है इक नया सबक हर दिन
जिंदगी के मकतब में डिग्रियांँ नही मिलतीं/8/
घर बिका है बाबुल का बालियाँ बिकी माँ की
बेटियों की सस्ते में डोलियाँ नही मिलतीं/9/
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