22 22 22 22 22 2
अब तो बस बेकार की बातें होती है
बे मतलब तकरार की बातें होती हैं /1/
लगती थी चौपाल कभी बरगद नीचे
अब गुजरे गुलजार की बातें होती हैं /2/
यूँ तो तुमसे यार बहुत कुछ कहना था
लेकिन बस व्यापार की बातें होती हैं /3/
कुछ बातों पर पर्दा दारी अच्छी है
कुछ इज्जत संस्कार की बातें होती हैं/4/
रिश्ते नाते घर पर अब मुरझाते हैं
मोबाइल पर चार की बातें होती हैं/5/
उम्मीदों से ही उम्मीदें होतीं हैं
उनसे ही बस प्यार की बातें होती हैं/6/
आंसू पीकर भी चुप रहना पड़ता है
हँसकर बस व्यवहार की बातें होती हैं/7/
जीवन में समझौता करना पड़ता है
हर पल ना गुलज़ार की बातें होती हैं/8/
चलना सीखा और घरौंदा छोड़ दिया
ये मतलब के यार की बातें होती हैं/9/
अपना अपना हिस्से का सब जीते हैं
कहने को संसार की बातें होती हैं/10/
ईश्वर से अब सौदे बाजी होती है
कब उनसे उपकार की बातें होती हैं/11/
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