2122 1212 22
कट गई यूँ ही जिन्दगी अपनी
बस नजर आयी बेबसी अपनी /1/
हम तरसते रहे हंसी के लिए
मुँह छुपाये रही खुशी अपनी /2/
जिनसे उम्मीद थी वफाओ की
उसने की खूब दुश्मनी अपनी/3/
वो फरेबो का कारबारी है
मात खाती है सादगी अपनी/4/
वो तो उल्फत को खेल कहते है
हम जिसे समझे बंदगी अपनी/5/
हाल दिल के बयां है चेहरे से
हमको मालूम है कमी अपनी /6/
इक हंसी को था जिंदगी माना
सौप दी उसको ही हंसी अपनी/7/
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