Monday, 7 February 2022

कट गई यूँ ही जिन्दगी अपनी

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कट  गई  यूँ  ही जिन्दगी अपनी
बस  नजर  आयी बेबसी अपनी /1/

हम  तरसते  रहे  हंसी  के  लिए 
मुँह  छुपाये  रही   खुशी  अपनी /2/

जिनसे  उम्मीद थी वफाओ की
उसने  की  खूब  दुश्मनी अपनी/3/

वो      फरेबो  का    कारबारी है
मात  खाती  है  सादगी   अपनी/4/

वो तो उल्फत को खेल कहते है 
हम  जिसे  समझे बंदगी अपनी/5/

हाल  दिल  के  बयां है  चेहरे से
हमको  मालूम  है  कमी अपनी /6/

इक हंसी को था  जिंदगी  माना
सौप दी  उसको ही हंसी अपनी/7/

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