1212 1122 1212 22
बुझे बुझे से चरागों को फिर जलाओ तो
बहुत अंधेरा यहाँ है उजाले लाओ तो/1/
तरस गये हैं यहाँ धूप देखने के लिए
अंधेरी बस्तियों में शम्स इक उगाओ तो/2/
तड़प को भूख को अहसास कर सको तो कहो
तसल्लियों के मुहल्ले गुजर के आओ तो/3/
कभी तो टूटे हुए ख्वाब के चुभें किरचें
उदासियों के सहारे कभी बिताओ तो/4/
लगन को कांटो की परवाह कुछ नही होती
किसी के साथ भी शिद्दत से तुम निभाओ तो/5/
ठनी रही है जरुरत की ख्वाहिशों से सदा
नसीब राह सहल अब कोई बनाओ तो/6/
तरस गयी है निगाहें भी ताकते रस्ता
कभी तुम अपनी जरा सी झलक दिखाओ तो/7/
फकत किसी भी बहाने से दो घड़ी को सही
उलाहने ही तुम आकर कभी सुनाओ तो/8/
No comments:
Post a Comment