212 212 212 212
तौर जीने का वो जानता है बहुत
मुश्किलो संग रिश्ता रहा है बहुत/1/
उम्र जद्दोजहद में ही गुजरी है बस
भीड़ मे भी वो तन्हा दिखा है बहुत/2/
झुग्गियों में उजाला नजर आ रहा
आस उम्मीद का इक दिया है बहुत/3/
कोठियों में तो रिश्ते हुए बे लिबास
मुफलिसों घर में परदा मिला है बहुत/4/
सर झुका है सदा आस्तानो में बस
दिल भला और बुरा जानता है बहुत/5/
उम्र भर की कमाई है बस रद्दियाँ
सोचकर दिल पशेमां हुआ है बहुत/6/
हार आखिर गया संग दिल बाप से
करते बेटी बिदा रो रहा है बहुत/7/
बस जरा बस जरा कर गई जिंदगी
जिंदगी बेवफा बेवफा है बहुत/8/
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