Monday, 7 February 2022

बात निकली है फिर जमाने की

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बात  निकली  है   फिर  जमाने की
रंजो गम    की      नये    पुराने की/1/

जिक्र   उनका    जरूर   निकलेगा
बात  फिर  होगी  दिल   दुखाने की/2/

वो  मेरे  साथ  ही  थे  जब  उनकी
थी  खबर   आयी   लौट  आने की/3/

जिंदगी   छोड़ती   न    कोई कसर 
है  किसी  को  भी    आजमाने की/4/

नाज़  नखरे      बड़े     दिखाती है 
इसकी  आदत  है   रूठ  जाने की /5/

जिंदगी  का   तो   रोज़  का  है  ये 
अपनी  फितरत   नही   मनाने की/6/

दिल ने   उम्मीद    छोड़  दी   तेरी
अब   जरुरत   नही      बहाने की/7/

गर न था दिल में कुछ तो कह देते
बात  ये  तो   न  थी    छिपाने की/8/

क्या  हुआ  गर   बुरा  है  रहने दो
अब न  कोशिश हो  बरगलाने की/9/

कुछ  न  होगा   कुरेद  जख्मों को
हमको  आदत  है    मुस्कुराने की/10/

तंग अब  आ गये हैं सुन सुन कर
मत  करो  बात  दिल  दुखाने की/11/

मिल गये  यार  जब  नये  तुमको
क्या  जरुरत है  अब    पुराने की/12/

रूठ  तो  जाएं  पर ये मुश्किल है
उनकी  आदत  नही   मनाने की/13/

चाह  उट्ठी  है  दिल  में हँसने की
कुछ तो  दो  वज्ह  मुस्कुराने की/14/

घर में   उम्मीदें    राह  तकती हैं 
फिर जरूरत है  इक फसाने की/15/

आप   कहते  हैं   तो   न  रोयेंगे 
जिद  करो  अब न मुस्कुराने की/16/

कोई  उम्मीद मत किसी से करो
वज्ह  बनती  है  ये   रुलाने की/17/

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