2122 1212 22
बात निकली है फिर जमाने की
रंजो गम की नये पुराने की/1/
जिक्र उनका जरूर निकलेगा
बात फिर होगी दिल दुखाने की/2/
वो मेरे साथ ही थे जब उनकी
थी खबर आयी लौट आने की/3/
जिंदगी छोड़ती न कोई कसर
है किसी को भी आजमाने की/4/
नाज़ नखरे बड़े दिखाती है
इसकी आदत है रूठ जाने की /5/
जिंदगी का तो रोज़ का है ये
अपनी फितरत नही मनाने की/6/
दिल ने उम्मीद छोड़ दी तेरी
अब जरुरत नही बहाने की/7/
गर न था दिल में कुछ तो कह देते
बात ये तो न थी छिपाने की/8/
क्या हुआ गर बुरा है रहने दो
अब न कोशिश हो बरगलाने की/9/
कुछ न होगा कुरेद जख्मों को
हमको आदत है मुस्कुराने की/10/
तंग अब आ गये हैं सुन सुन कर
मत करो बात दिल दुखाने की/11/
मिल गये यार जब नये तुमको
क्या जरुरत है अब पुराने की/12/
रूठ तो जाएं पर ये मुश्किल है
उनकी आदत नही मनाने की/13/
चाह उट्ठी है दिल में हँसने की
कुछ तो दो वज्ह मुस्कुराने की/14/
घर में उम्मीदें राह तकती हैं
फिर जरूरत है इक फसाने की/15/
आप कहते हैं तो न रोयेंगे
जिद करो अब न मुस्कुराने की/16/
कोई उम्मीद मत किसी से करो
वज्ह बनती है ये रुलाने की/17/
No comments:
Post a Comment