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देखने भर को ही गुलज़ार लिए फिरता है
हर कोई दिल में बहुत रार लिए फिरता है/1/
हर रवायत ही निभाता है बड़ी शिद्दत से
आदमी साथ ही व्यवहार लिए फिरता है /2/
सुब्ह से शाम तलक दिल है जरूरत के बस
चलता फिरता कोई बाजार लिए फिरता है/3/
प्रेम छूता है हृदय को ही सदा पहले तो
देह तो बाद में हकदार लिए फिरता है/4/
जिंदगी कैद जहाँ चार दिवारों में हुई
शह्र ऐसा गुले गुलजार लिए फिरता है/5/
दे दुहाई कोई लाखों यहाँ पे छप्पर के
हुक्मराँ जह्न में मे'आ'र लिए फिरता है/6/
देख मंजर जहाँ खामोश हुए शब्द सभी
वक़्त पहलू में वो असरार लिए फिरता है/7/
बादशाही को जरा कम है दिखाई देता
अपनी आंखों में वो लश्कार लिए फिरता है/8/
आइना सामने बस अपने कभी रखता नही
आदमी दुनिया का अखबार लिए फिरता है/9/
फायदे देख जहाँ होती है नातेदारी
दिल है अहमक वहाँ पे प्यार लिए फिरता है/10/
कौन मिलता है किसी से भी यहाँ बे मकसद
कुछ न कुछ हर कोई दरकार लिए फिरता है/11/
मे'आ'र - स्तर प्रतिष्ठा
असरार - भेद राज
लश्कार - चमक
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