1212 1122 1212 22
मुहब्बतों की सजा बे मिसाल दी उसने
उदासियों की कुछ आदत सी डाल दी उसने/1/
तमाम लानतों की माँ है भूख जिसने कहा
शिकम के आग की अच्छी मिसाल दी उसने/2/
तलाक देती जुबां को पता नही होता
किसी की जिंदगी पल में उबाल दी उसने/3/
जरा सी रोशनी की इल्तिजा थी रब से मेरी
इनायतों की बड़ी खेप डाल दी उसने/4/
गुमाँ न पाने पे खोने पे कुछ मलाल नही
ये तरबियत कुछ अलग सी कमाल दी उसने/5/
वो एक रात जला कह दिया चराग उसे
हमारी जद्दोजहद हँस के टाल दी उसने/6/
भुला न दीये को देना सुब्ह उजालों में
जला के खुद को तजल्ली उछाल दी उसने/7/
लगे हैं आने परिंदे मुंडेर पर फिर से
यकीं की छत पे चुगौने जो डाल दी उसने/8/
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