2122 2122 2122 2122
बस प्रभू श्री राम का ही अनुशरण मैं चाहता हूँ
चित्त में बैठे दशानन का दहन मैं चाहता हूँ/1/
यूँ हमारे ही शहर में है बहुत मंदिर शिवालय
हो जहाँ इंसानियत ठहरी भवन मैं चाहता हूँ/2/
पोंछ दे आकर कभी आंसू सुदामा के कन्हैया
चाह मन में है कभी ऐसा रुदन मैं चाहता हूँ/3/
लौट ना जाए कभी मायूस होकर बेबसी ही
आरज़ू उम्मीद पूर्ति का सदन मैं चाहता हूँ/4/
आपसी रंजिश न हो आदमी से आदमी की
हर तरफ सुख चैन हो ऐसा वतन मैं चाहता हूँ/5/
बंद कर दो अब फसादी बात उन्मादी कसीदे
अब घरों घर देखना हर पल अमन मैं चाहता हूँ/6/
अब रहे भूखा न कोई अब रहे प्यासा न कोई
अब न रोता ही दिखे उल्लास मन मैं चाहता हूँ/7/
मुश्किलें कर ले वहन सारी घड़ी भर में स्वयं ही
जिंदगी में मित्र की सूरत किशन मैं चाहता हूँ/8/
बस मिले ईमान की रूखी मिले सूखी मिले कुछ
हक किसी का छीन भोजन ना भजन मैं चाहता हूँ/9/
बस प्रभू का नाम सुबहो शाम मैं भजता रहा हूँ
जिंदगी यूँ ही गुजर जाए शयन मैं चाहता हूँ/10/
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