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सहमी रही लरजती रही हर खुशी मेरी
लगती है अजनबी सी मुझे जिंदगी मेरी/1/
कोशिश जरा भी की जो कभी मुस्कुराने
हर दफ्अ आयी सामने ही बेबसी मेरी/2/
रहबर समझ रहे थे जिसे होशियार था
दौलत कमाया बेच के बेचारगी मेरी/3/
गर ये कुबूलियत की घड़ी है मेरे खुदा
लौटा दे कुछ घड़ी के लिए बस हँसी मेरी/4/
मिट्टी में खेल कर हैं बहल जाते नौनिहाल
अहसास है उन्हें भी तो अब हर कमी मेरी/5/
आंसू यहाँ निषेध है मुस्कान है अवैध
कब से है कैद कोठियों में रोशनी मेरी/6/
हर दिन नया तमाशा अदाएं नई नई
भाती है खूब जीस्त को भी सादगी मेरी/7/
कांधो पे लाद करके जरूरत की पोटली
चल पड़ती रोज़ सुब्ह ही लाचारगी मेरी/8/
आते नही सुदामा के घर में कभी किशन
लाचार इस कदर रही है दोस्ती मेरी/9/
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