1212 1122 1212 22
खुशी की आस में कर जिंदगी उधार चले
जरूरतों के ही होकर के दिन गुजार चले/1/
निकल पड़े हैं हर इक सुब्ह ढुंढने खुद को
हर एक शाम बदन खूंटी पर उतार चले/2/
तमन्ना आरजू उम्मीद रख के पहलू में
खयाल ख्वाब की दुनिया सजा सँवार चले/2/
तसल्लियों में रही गुम तमाम खुशियाँ सदा
कदम कदम से मिला गम भी बेशुमार चले/4/
भटक रही है कज़ा कब से जुस्तजू में मियां
बदन से रूह भला कब तलक फरार चले/5/
ये फूल खुशबू ये गुलशन ये रंग रौनक सब
चलो जो साथ मेरे तुम तो फिर बहार चले/6/
हवाएँ शाम से दहलीज पर ही बैठीं हैं
जले चराग तो फिर झूम के बयार चले/7/
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