Monday, 7 February 2022

खुशी की आस में कर जिंदगी उधार चले

1212 1122 1212 22 
खुशी की  आस में  कर  जिंदगी उधार चले
जरूरतों  के ही होकर  के  दिन गुजार चले/1/

निकल पड़े हैं  हर इक  सुब्ह ढुंढने खुद को
हर एक शाम   बदन   खूंटी  पर उतार चले/2/

तमन्ना  आरजू  उम्मीद   रख  के   पहलू में 
खयाल  ख्वाब की दुनिया सजा सँवार चले/2/

तसल्लियों में रही गुम  तमाम खुशियाँ सदा
कदम कदम से  मिला गम भी बेशुमार चले/4/

भटक रही है कज़ा कब से जुस्तजू में मियां 
बदन से  रूह  भला कब तलक फरार चले/5/

ये फूल खुशबू ये गुलशन ये रंग रौनक सब
चलो  जो  साथ मेरे तुम तो फिर बहार चले/6/

हवाएँ  शाम  से   दहलीज  पर  ही  बैठीं हैं
जले  चराग  तो  फिर  झूम  के  बयार चले/7/

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