221 2122 221 2122
हर दिन नया तमाशा मालिक दिखा रहा है
पल में हंसा रहा है पल में रुला रहा है/1/
मर्जी उसी की प्यारे जैसी गुजार दे वो
उसके ही हाथ जीवन वो ही चला रहा है/2/
खुदगर्जियाँ हैं मेरी कुछ अर्जियाँ है मेरी
सब अर्जियाँ वो मेरी इक इक निभा रहा है/3/
दर पर जो आया तेरे हर कोई था सवाली
सबने ही मांगा तुझसे बस मांगता रहा है/4/
किसने मिजाज पूछा कब तेरा हाल जाना
मतलब से हर कोई बस तुझे पूजता रहा है/5/
तूने है मान रक्खा सबका ही ध्यान रक्खा
जिसकी थी चाह जैसी रहमत लुटा रहा है/6/
संतुष्टियाँ नही है जद्दोजहद बड़ी है
जितना मिला जिसे उतनी और लालसा रहा है/7/
मांगा है श्याम से सब बस श्याम को भुला कर
कमबख्त दिल सदा से गुस्ताख सा रहा है/8/
है लफ्ज़ यूँ हजारों बढ़ कर न मां से कोई
दुनिया में माँ से प्यारा ना दूसरा रहा है/9/
श्रद्धा के पुष्प तुझ पर करता हूँ मैं समर्पित
बस भावना है मेरी बाकी तो सब तेरा है/10/
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