122 122 122 122
मुकद्दर में कुछ तो यकीनन कमी है
मिली दर ब दर की हमे जिंदगी है/1/
तमन्नाएं हर दिन हुई है पशेमां
जरूरत सदा मुँह को खोले खड़ी है/2/
कभी चाहिए कुछ कभी चाहिए कुछ
जरूरत की जैसे झड़ी सी लगी है/3/
बड़ी कशमकश खूब जद्दोजहद है
कहा किसने आसान कब जिंदगी है/4/
तमाशा बना खूब पहले तो मेरा
बहुत बाद हुई मेरे घर रोशनी है/5/
इजाजत की क्या है जरूरत कभी भी
सियासत लहू की तो प्यासी रही है/6/
अंधेरों की आदत मुझे पड़ गयी जब
जरा रौशनी सी दिखाई गयी है/7/
कमी कुछ खयालों में भी हो यकीनन
जरा गर्द सी जह्न में भी दिखी है/8/
बड़ी ही मशक्कत से वो याद आए
कवायद की सब वज्ह जिनसे रही है /9/
भला जिंदगी से शिकायत करें क्या
सदा से रही बन के ये अजनबी है/10/
वही एक ही बात हर पल हमेशा
मुसीबत मुसीबत मुसीबत बड़ी है/11/
बहुत आंकलन कर लिया छोड़ दो अब
बुरा सोचना जी लो बस जिंदगी है/12/
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