खुद को उम्र भर अख़बार किया है हमने
अपने वजूद का इश्तेहार किया है हमने
धूप छांव के खेल खेलती रही है जिंदगी
खुशी बेचने का कारोबार किया है हमने
सिसकती मिली उम्मीदें हसरतें ख्वाहिशें
कुछ यूँ अपने को लाचार किया है हमने
टपकते है आंसू टूटे फुटे उन छप्परों से
रिश्तों को टूटने से इंकार किया है हमने
चार दीवारें है घर में दरकती सीलन भरी
हिफाजते खुद को दीवार किया है हमने
ये और बात है कि हम समझ नही पाये
देर तक जिंदगी का दीदार किया है हमने
पुराने जख्मों के टांके फिर खुल गये हैं
दर्द सहने खुद को तैयार किया है हमने
बेलुफ्त बेसबब तू गुजर रही थी जिंदगी
तेरे हक में अहम किरदार किया है हमने