Sunday, 1 October 2017

दिल की बातें दिल में रह गई

दिल की बातें दिल में रह गई लब रहे खामोश सदा
नजरों से वो समझ सके न मेरे दिवाने दिल की सदा

दूर से ही तकते उन्हें कभी ना उनका रूबरू हुआ
खबर हुई न उन्हें जरा भी नजरों ने कर दी उल्फत अयां

निगाहें उनकी न हुई हम पर गुजरे करीब से कई मर्तबा
हम उन्हें गुजरते तकते रहे बन कर पत्थर बेजुबां

Friday, 1 September 2017

कुछ वहाँ चीज़े हम पुरानी छोड़ आए हैं

कुछ वहाँ चीज़े हम पुरानी छोड़ आए हैं,
आते आते आँखो मे पानी छोड़ आए हैं

कई ख्वाब सडकों पर  भागते फिरते हैं
तन्हा तन्हा सी जिंदगानी   छोड़ आए हैं

जानने वाले हमे यहाँ बहुत से है लेकिन
अपनी वहां पहचान पुरानी छोड़ आए हैं

जरा जरा सी ही जो      अब रह गई हैं
आधी-अधूरी सी   कहानी छोड़ आए हैं

मुश्किलात संग अपना   राब्ता पुराना है
आफत की फिर   निशानी छोड़ आए हैं

अदायत को अपने अब आता नही कोई
उनके ही दर ये मेहरबानी  छोड़ आए हैं

था पहले भी मुझमे अब भी है मुझमे वो
बेलफ्ज    खामोश जुबानी छोड़ आए हैं

Sunday, 20 August 2017

नही मिलती कोई खुशी
अब
तुम्हे देखकर
उदास हो जाता है मन

वक्त की परतो के नीचे दबे
लम्हे

तेरी यादों के झोंके से
निकल आते है बाहर

बहुत दुखता है
मन के भीतर कुछ

जब भी तुझसे
निगाहें टकराती है
आजकल

फिर से उन लम्हों को
जीने को

लालायित हो उठता है
ये बावरा मन

दबाना पड़ता है
सीने में ही
बेलिबास हसरतों को

बहुत समझाना पड़ता है
खुद को

अब तुझमे कोई
बस नही रह गया है मेरा

मगर ये जो तेरी यादें हैं
ये मेरे बस मे नही

आ ही जाती है
गाहे ब गाहे

मुझसे
इजाजत लिए बगैर

Monday, 29 May 2017

ओ कागजी शेरों अब ये जंग जुबानी बंद करो

ओ कागजी शेरों  अब ये  जंग जुबानी बंद करो
हाथ खोलो असली शेरो का अब सीधे जंग करो

मुगालता है दुश्मन को ये देश महज गरियाता है
मुंह खोल तोपों का बता दो हमें लडना आता है

आपके निंदा की पुरा मुल्क कड़ी निंदा करता है
ये मुंह बयानी हमारे हौसले को शर्मिंदा करता है

अंधी लंगड़ी गुंगी बहरी सी दिखती ये सरकार है
कहने लगे हैं अब तो सब ये रंगा हुआ सियार है

अपनी न सही देश की ही लाज बचालो मोदीजी
राष्ट्रधर्म जो सीखा संघ से उसे निभालो मोदी जी

मेंहदी  वाले  हाथों ने  जब  मंगलसूत्र  उतारा है
छप्पन इंची छाती लेकर भी बाप बेचारा हारा है

इस त्योहार जो बेटा मां की साड़ी लाने वाला था
वो वीर सिपाही देश के तिरंगे मे लिपटा आया है

कबतक इन शहीदों का अपमान करोगे मोदीजी
दुश्मन की गीदड़भभकी कितना सकोगे मोदीजी

एक बार ऐलान तो कर दो  होश  बिगाड़ रख देंगे
हमने जो  हाथ खोले तो  पडोस  बिगाड़ रख देंगे

इतिहास तो हमारा ही है भूगोल भी बदल जायेगा
अबके युद्ध से घाटी का माहौल भी बदल जायेगा

देश में आक्रोश बहुत है कुछ तो करो ऐ मोदी जी
उबल रहा है सारा मुल्क यूँ चुप न रहो ऐ मोदी जी

Sunday, 19 February 2017

कहानी खत्म होने पर भी किस्सा बाकी रहे

कहानी खत्म होने  पर भी  किस्सा बाकी रहे
हर शख्सियत के भीतर एक बच्चा बाकी रहे

कमी  कोई तो  रह  गई है  मौला  तेरे देने में
ऐसा क्या की जिन्दगी में बस धुंआ बाकी रहे

नही देता है  बिखरने  सिमटे हुए  जज़्बो को
जब तलक उम्मीदों का  एक लम्हा बाकी रहे

जिंदा रहने के लिए चंद सिक्के भी जरूरी है
यूँ न हो परदा गिरे तो बस तालियां बाकी रहे

हंसाया खूब किरदार ने खेल जारी रहने तक
तमाशे खत्म फिर काहे सिसकियाँ बाकी रहे

आंसूओ के हिसाब कौन रखता है

आंसूओ के हिसाब कौन रखता है
हाथ  सुखे "गुलाब" कौन रखता हैं

होंगी  कुछ  तो  जरूर  मजबूरियां
वरना सर पे अजाब कौन रखता है

नहीं  फबती  है  हरदम  उदासियां
यूँ ही  चेहरे  नकाब कौन रखता है

ढुंढ लेती है  खुद  मुश्किले  हमको
चाह  करके  जनाब कौन रखता है

अपनी ख्वाहिश है धूप मुट्ठी भर ही
अपने घर आफताब कौन रखता है

बरसी है  बेहिसाब  ही  तसल्लियां
इतने  झुठे  हुबाब  कौन  रखता है

आरज़ू  शिकवे  उम्मीद  बेचैनियां
साथ इतने अहबाब कौन रखता है

मुस्कुराहट  तबस्सुम  ये  कहकशें
गम के है असबाब कौन रखता है