Monday, 7 February 2022

हमारे दरमियाँ अब व्यर्थ के किस्से नही होते

1222 1222 1222 1222 
हमारे  दरमियाँ   अब  व्यर्थ  के   किस्से   नही  होते
हुई  है  बंद    जब  से   गुफ्तगू    झगड़े   नही  होते/1/

सफर में साथ रख लो याद कुछ अच्छे दिनों की भी
समय  के  पास  मोहलत  के  कोई  लम्हें  नही होते/2/

जिसे  अपना  कहा  हमने  कभी  अपना नही होता
बुरे  निकले  सदा  हम  ही  कभी  अच्छे  नही  होते/3/

मुसीबत  के  समय  हिम्मत  बने  दे हौसला सबको
कहीं  सय्यास  भी   अब   मोतबर  इतने  नही होते/4/

लगा कर  आग  बस्ती में  हवन  करनी सियासत है
बिना  उन्माद   तो  इनके    सफल  धंधे  नही होते/5/

भरा  हो  पेट  तब  ही   सूझती  है  क्रांति  की  बातें
तड़पते   भूखे   लोगों  में    कभी   दंगे   नही  होते/6/

बने  जो  कागजों  पर  घर  बने  होते  हकीकत गर
हजारों  सर  अभी  फुटपाथ  पर   सोते  नही  होते/7/

कहीं  कपड़े  कहीं  गहने    कहीं  पे  कार आती है 
दवाई   माँ  की   लाने  को   मगर   पैसे  नही  होते/8/

सबक  हर  मोड़  पर  ही  जिंदगी  देती है अच्छे से
किसी  के  तौर लेकिन  कुछ समझने के  नही होते/9/

स्वयं की  कर  खुदाई   चाहता  है  गर  मिले  ईश्वर 
जियारत  से   इबादत  से   खुदा  अपने  नही  होते/10/

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