1121 2122 1121 2122
थी हमारी चाह ऐसी हमें गम मिले जरा सा
मिला गम हमें फिर इतना कि न हम बचे जरा सा /1/
कभी रोये दिल ही दिल में कभी आंसू हम बहाए
कभी गम छिपाने हँसते से भी हम दिखे जरा सा /2/
कभी जान कर हकीकत रहे ख्वाब में ही खोये
टूटे ख्वाब सब कदम जब पड़े शम्स के जरा सा /3/
कहें अब कसूर किसका ये नसीब है हमारा
सभी लोग अच्छे हैं बस बुरे हम ही थे जरा सा /4/
हम उठाये नाज उनके हैं सदा ही हंसते हंसते
हो गये खफा जो किस्से सुने दर्द के जरा सा /5/
सभी पूछते हैं हमसे इन उदासियों के किस्से
किसी को न दर्द दिखता कभी चेहरे पे जरा सा /6/
उन्हे तो लगे है अपने दिये हर सितम ही थोड़े
तभी हैं सताते ज्यादा और पूछते जरा सा /7/
हमें कह रहें वो कच्चे अभी हो बहुत ही दिल के
किया इश्क है अगर तो रहो दर्द में जरा सा/8/
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