Friday, 15 May 2020

यूँ आंकड़ों से भूख भगायी न जायेगी

221 2121 1221 212 
यूँ   आंकड़ों  से   भूख  भगायी   न   जायेगी
रोटी    तसल्लियों   से   जुटायी   न   जायेगी

देखे   सुनहरे   ख्वाब   है   ता जिंदगी   बहुत 
ख्वाबों  से  अब  ये  आग  बुझायी न जायेगी

बैठे   हुए  हैं   घर  पे  ही   दो  माह   हो  गये
इस  तरह   उम्र   और   बितायी   न  जायेगी

कबतक दिलासे खुद को दें सब ठीक ठाक है
अब  असलियत  से  आंख चुरायी न जायेगी

क्या कह रहे हो  दिल पे  लगाना  न बात को
कुछ  बातें   उम्र भर  ही  भुलायी  न जायेगी

लहजा  मिजाज   नाज   नजरिया  बकायदा
बरसों  जहन  से  तल्खी  मिटायी  न जायेगी

लफ्फाजियों  का  दौर है  इक और भी  सही
पर  यूँ   फजीहतें   तो   करायी    न जायेगी

कहने  को  कह गया  है  वो मै हूँ न साथियों
उस  पर  यकीं  की  राह  बनायी  न जायेगी

कुछ कर गुजरने वास्ते  कुछ कर गुजर जरा
बातों  से   जिंदगी   तो   सजायी  न जायेगी

मंहगे   बहुत  है   ख्वाब  तसल्ली  सुकून के
लत  ये  फिजूल खर्ची   लगायी  न  जायेगी

धोखा  फरेब  झूठ   अलग  बात   है  मियां
सच  की  बिना  पे  लूट  मचायी  न जायेगी

हर  मोड़  पे  है  मुंतजिर  इक  हादसा नया
यूँ  हादसों  पे  खुशियां  मनायी  न  जायेगी

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